मनोहरपुर संवाददाता : कभी वर्ष 2000 के दशक से नक्सलियों का मजबूत गढ़ माना जाने वाला सारंडा अब उनके लिए सुरक्षित ठिकाना नहीं रह गया है। हाल के घटनाक्रम और लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों से यह साफ संकेत मिल रहा है कि सारंडा में नक्सलवाद अपने अंतिम दौर की ओर बढ़ रहा है। लगातार हो रहे सरेंडर, मुठभेड़ और सप्लाई लाइन टूटने से नक्सली संगठन कमजोर पड़ता दिख रहा है।

5 इनामी लाख नक्सली आशा दी उर्फ बेला सरकार की फोटो
वर्तमान समय में सुरक्षा बलों की रणनीति ने नक्सलियों को भारी नुकसान पहुंचाया है। सारंडा क्षेत्र में कई बार सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच आमना-सामना हुआ, जिसमें नक्सलियों को ही अधिक क्षति उठानी पड़ी। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा नक्सलियों की सप्लाई लाइन पूरी तरह काट दिए जाने से संगठन की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
सारंडा में ठिकाने कमजोर पड़ने के बाद नक्सली एक बार फिर कोल्हान के जंगलों की ओर रुख करने लगे। इसी बीच 24 अप्रैल 2026 की रात एक घटना ने नक्सली संगठन की स्थिति को और उजागर कर दिया। ड्रेरवा के दुगुनिया गांव निवासी रमेश चाम्पिया उर्फ चमरा की चार हथियारबंद नक्सलियों ने घर से बुलाकर पीट-पीट कर हत्या कर दी। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई। सूचना मिलते ही सुरक्षा बल और एजेंसियां सक्रिय हो गईं और यह स्पष्ट हो गया कि नक्सली अब सारंडा छोड़कर कोल्हान क्षेत्र में शरण लेने की कोशिश कर रहे हैं।
इसके बाद सुरक्षा बलों ने इलाके में घेराबंदी अभियान तेज किया। 29 अप्रैल को कोल्हान के रोटागुटु जंगल में हुई मुठभेड़ में एक लाख रुपये के इनामी नक्सली इजराइल पुर्ती उर्फ अमृत पुर्ती को सुरक्षा बलों ने मार गिराया। मुठभेड़ के बाद अन्य नक्सली जंगल की ओर भाग निकले। घटनास्थल से भारी मात्रा में नक्सली सामग्री भी बरामद की गई।
लगातार दबाव और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के कारण अब कई हार्डकोर नक्सली सरेंडर कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार सारंडा और कोल्हान क्षेत्र के कई स्थानीय कैडर आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जबकि बचे हुए नक्सली भी संगठन छोड़ना चाहते हैं। हालांकि बड़े नेताओं के दबाव के कारण वे खुलकर सामने नहीं आ पा रहे हैं।
वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि अब सारंडा हो या कोल्हान, कोई भी इलाका नक्सलियों के लिए पहले जैसा सुरक्षित नहीं रह गया है। कभी जहां बालिबा, तिरिलपोसी, बिटकिलसोया, बाबुडेरा, चाड़राडेरा, थोलकोबाद, मांगरपोगा, कोलबोंगा और उसुरुया जैसे इलाकों में नक्सलियों की खुली आवाजाही रहती थी, वहीं अब वे इन क्षेत्रों से पीछे हटते नजर आ रहे हैं। सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और स्थानीय स्तर पर बढ़ती सतर्कता ने पूरे परिदृश्य को बदल कर रख दिया है।
