झारखंड  के नाराज वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने लौटा दी सरकारी गाड़ी और सिक्योरिटी, DGP को लिखी चिट्ठी

रांचीः झारखंड के वित्त मंत्री अपनी ही हेमंत सोरेन सरकार पर बुरी तरह से बिफरे हुए हैं। बिहार की तरह ही यहां भी सुरक्षा पर जमकर सियासत शुरू हो गई है। हाल ये है कि वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपने सभी सुरक्षाकर्मियों को वापस भेज दिया है। यही नहीं अपने काफिले की 3 गाड़ियां (बोलेरो जीप) भी उन्होंने लौटा दी है। अब मंत्री बिना सिक्योरिटी के इधर उधर जा रहे हैं।

झारखंड के वित्त मंत्री अपनी ही सरकार से नाराज

झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इसी के साथ 29 जून 2026 को राज्य के डीजीपी को एक चिट्ठी भी लिख दी। बतौर एक मंत्री की लिखी चिट्ठी के मजमून तो काफी गंभीर हैं। राधाकृष्ण किशोर ने लिखा है कि ‘मैंने आपको 21 अप्रैल 2026 को ही सूचित किया था कि मेरी सुरक्षा के लिए कुल 16 पुलिस बलों को उपलब्ध कराया गया है।’

DGP को लिखी चिट्ठी

मंत्री ने अपने खत में आगे लिखा है कि ‘पत्र के माध्यम से मैंने ये भी बताया था कि मात्र तीन सरकारी वाहनों में 16 पुलिस बलों को एडजस्ट करने में परेशानी होती है। वाहनों में पुलिस के जवानों को ठूस कर बिठाना सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से उचित प्रतीत नहीं होता है। मैंने आवश्यकता अनुसार 4 वाहनों के आवंटन के लिए आपको पत्र लिखा था। लेकिन इसका कोई उत्तर नहीं मिला।’

वित्त विभाग के संयुक्त सचिव द्वारा मेरे आप्त सचिव को दिया नोटिस मेरे लिए Embarrassing है। अत: मैं वाहन सहित पुलिस बलों को वापस कर रहा हूं।

अपने सुरक्षागार्ड और गाड़ियां लौटाईं

इसके बाद आगे मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने लिखा है कि ‘संयुक्त सचिव, वित्त विभाग के द्वारा मेरे आप्त सचिव को दिया नोटिस मेरे लिए Embarrassing है। अत: मैं वाहन सहित पुलिस बलों को वापस कर रहा हूं।’ मंत्री की इस चिट्ठी की चर्चा अब झारखंड के सियासी गलियारों में भी हो रही है।

अभी सुरक्षाकर्मियों को DGP की तरफ से आवास पर ही रहने का निर्देश

बताया जा रहा है कि वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की सुरक्षा में 16 कमांडो लगे हुए थे। इसके अलावा स्पेशल ब्रांच के 3 पुलिस अफसरों की भी ड्यूटी उनके पास लगाई गई थी। इन सभी को उन्होंने वापस लौटा दिया। हालांकि डीजीपी के आदेश के बाद मंत्री की सुरक्षा कर रहे स्टाफ को DGP की ओर से आदेश देकर अभी उनके आवास पर ही रहने को कहा गया है। लेकिन वित्त मंत्री उन्हें किसी दौरे या कहीं बाहर निकलने की सूरत में साथ लेकर नहीं जा रहे।

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