Amazon का भारत में सबसे बड़ा दांव, 30 हजार करोड़ का निवेश, 550 नए स्‍टोर खुलेंगे

, जानिए कहां बनेंगे बंपर जॉब के अवसर?

दूध चाहिए या फल-सब्‍जी, 10 मिनट में हाजिर. पूजा-पाठ से किचन के सामान तक और साबुन-टूथपेस्‍ट से टॉयलेट-फ्लोर क्‍लीनर तक… हर तरह के सामान ऑर्डर करते ही 10 मिनट में सामने. ये कमाल संभव हुआ है आपके मोबाइल में इंस्‍टामार्ट, ब्लिंकिट, जेप्‍टो, ओटीपी(Otipy) जैसे तमाम प्लेटफॉर्म के जरिये. इनका इस्‍तेमाल बढ़ता जा रहा है और ये बाजार भी.

148 करोड़ की आबादी वाला देश भारत उपभोक्‍ताओं के लिहाज से भी सबसे बड़ा देश है और इसलिए देश का क्विक कॉमर्स मार्केट भी तेजी से बढ़ रहा है.

न केवल देसी कंपनियां, बल्कि फ्लिपकार्ट जैसी विदेशी कंपनियां भी Minutes जैसी सर्विसेस के जरिये क्विक कॉमर्स मार्केट में उतर चुकी हैं और विस्‍तार कर रही हैं.

और अब Amazon ने भी भारत के क्विक कॉमर्स मार्केट में विस्‍तार का फैसला लिया है. कंपनी इसके लिए 3 बिलियन डॉलर यानी करीब 30 हजार करोड़ का निवेश करने जा रही है. देश में 550 नए स्‍टोर खोलने का कंपनी का प्‍लान है और इससे हजारों की संख्‍या में रोजगार पैदा होने की संभावना है.
अमेजन का क्विक कॉमर्स में अब तक सबसे बड़ा निवेश

कंपनी 2030 तक भारत के क्विक कॉमर्स कारोबार के विस्तार पर 28,000 करोड़ रुपये निवेश करने की योजना बना रही है. रॉयटर्स ने इस मामले की जानकारी रखने वाले दो लोगों के हवाले से बताया है कि ये अमेजन Amazon का इस सेक्टर में अब तक का सबसे बड़ा निवेश होगा.

योजना के मुताबिक, कंपनी साल 2027 के अंत तक करीब 1 बिलियन डॉलर और इसके बाद 2030 तक 2 बिलियन डॉलर और निवेश कर सकती है. ये निवेश मुख्य रूप से Amazon Now की पहुंच बढ़ाने और छोटे पड़ोस वाले वेयरहाउस का नेटवर्क मजबूत करने पर किया जाएगा.
750 से बढ़कर 1,300 स्टोर का लक्ष्य

Amazon Now के जरिए फिलहाल करीब 750 स्टोर से डिलीवरी की जा रही है. कंपनी अप्रैल 2027 तक इनकी संख्या बढ़ाकर करीब 1,300 करने का लक्ष्य रख रही है.

इन छोटे वेयरहाउस को ऐसे इलाकों में बनाया जाएगा, जहां से ग्राहकों तक सामान तेजी से पहुंचाया जा सके. कंपनी स्टोर में इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर को भी मजबूत करेगी. इसके साथ मांग का अनुमान लगाने के लिए AI टूल्स और प्रोडक्ट की रेंज बढ़ाने पर भी निवेश किया जाएगा.

Amazon ने निवेश की प्रस्तावित रकम पर टिप्पणी करने से इनकार किया है. हालांकि, कंपनी ने बताया कि उसके क्विक कॉमर्स कारोबार ने पिछले तीन महीनों में 1 बिलियन डॉलर की सालाना अनुमानित ग्रॉस सेल्स का आंकड़ा पार किया है. कंपनी के मुताबिक, ये Amazon India के इतिहास में सबसे तेजी से बढ़ने वाला ई-कॉमर्स कारोबार है.
41 बिलियन डॉलर का हो सकता है बाजार

क्विक कॉमर्स यानी कुछ ही मिनटों में सामान पहुंचाने का कारोबार भारत के शहरी बाजार में तेजी से बढ़ा है. दूध और चॉकलेट से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे सामान तक की खरीदारी का तरीका इससे बदला है.

Datum Intelligence के मुताबिक, भारत का क्विक कॉमर्स बाजार फिलहाल करीब 19 बिलियन डॉलर का है और 2030 तक इसके बढ़कर 41 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है.

इस बाजार में Eternal की Blinkit, Swiggy और IPO की तैयारी कर रही Zepto की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 77% है. तीनों कंपनियां मिलकर 4,500 से ज्यादा स्टोर चलाती हैं. वहीं Flipkart की हिस्सेदारी करीब 11% है और उसके 1,000 से ज्यादा स्टोर हैं. Amazon की बाजार हिस्सेदारी अभी करीब 6.2% है.
किन शहरों में बनेंगे बंपर रोजगार के अवसर?

बताया जा रहा है कि कंपनी का फोकस देश के उभरते बाजारों, जैसे कि छोटे शहरों और गांवों पर भी है. इन्‍हीं जगहों पर बंपर रोजगार के अवसर बनने वाले हैं. अभी पिछले ही दिनों अमेजन ने ई-कॉमर्स बाजार में मजबूती के लिए 150 नए डिलीवरी हब खोलने का फैसला लिया है.

ये सेंटर देश के छोटे शहरों में खोले जाएंगे, जिनमें चिक्कबल्लापुर, हासन, मेरठ, रामनगर, रायपुर, भोजपुर, बोकाजन, जालौन, जहानाबाद, नामसाई, पुरुलिया, रिभोई, सेनापति, शिवसागर, उदलगुड़ी, उखरुल और वोखा जैसे शहर शामिल हैं.

Amazon के सामने हालांकि Blinkit, Swiggy और Zepto जैसे खिलाड़ियों की मजबूत पकड़ की चुनौती है. इसके अलावा क्विक कॉमर्स में डिलीवरी कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता रही है. भारत सरकार ने जनवरी में कंपनियों से ऐसी सेवाओं को ’10 मिनट’ की डिलीवरी के तौर पर प्रचारित नहीं करने को कहा था.
रोजमर्रा के सामान पर रहेगा फोकस

Amazon फिलहाल क्विक कॉमर्स में रोजमर्रा की जरूरत वाले सामान पर ज्यादा ध्यान दे रहा है. कंपनी का मानना है कि जिन सामानों की दोबारा खरीद की संभावना कम है, उन्हें फिलहाल क्विक कॉमर्स स्टोर में रखने की जरूरत नहीं है. यही वजह है कि Amazon Now पर फिलहाल iPhone जैसे प्रोडक्ट को लेकर दूसरे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसी रणनीति नहीं है.

कंपनी का मानना है कि क्विक कॉमर्स में सिर्फ ग्रॉसरी से ज्यादा कमाई करना मुश्किल है, क्योंकि ऑर्डर की औसत कीमत कम रहती है. ऐसे में ज्यादा कीमत और बेहतर मार्जिन वाले नॉन-ग्रॉसरी सामान भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं.

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