शनिवार को अचानक ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने वाले देशों के लिए टैरिफ में छूट दे दी. रूसी तेल खरीदने पर 100 फीसदी टैरिफ से भारत और चीन जैसे देशों को अस्थायी तौर पर छूट दे दी. हालांकि, ये हमेशा से 100 फीसदी टैरिफ नहीं था, बल्कि शुरुआत में 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने पर बात आई थी. बाद में धीरे-धीरे करके अब 0% टैरिफ का नियम लागू कर दिया गया है.
कुछ जानकारों का कहना है कि यह छूट ऐसे समय में दी गई है, जब खुद अमेरिका रूस से डीजल खरीदने को मजबूर हुआ है और रूस से डीजल को लेकर बड़ी डील की है. ऐसे में यह किसी दूसरे देश पर टैरिफ कैसे लागू कर सकता है? साथ ही भारत के साथ अमेरिका की डील पर बातचीत भी जारी है, जिस कारण अमेरिका कोई ऐसा रास्ता नहीं अपनाना चाहता है, जिससे भारत और अमेरिका के बीच बातचीत खराब हो.
एक्सपटृर्स ऐसे भी मान रहे हैं कि इसी तरह की कुछ चीजें अमेरिका की चीन को लेकर भी चल रही हैं, जिस कारण ट्रंप ने अमेरिका के हित में फैसला करते हुए अभी टैरिफ को रोका है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि रूसी तेल खरीदारों पर कभी भी टैरिफ लागू नहीं होगा. अमेरिका ने अपने निर्देश में कहा है कि वह जब भी चाहे टैरिफ लागू कर सकता है.
कैसे 500 फीसदी से 0 फीसदी टैरिफ पर आया अमेरिका?
रूस और यूक्रेन के बीच जंग जारी है और अमेरिका का कहना है कि रूस को पैसे का सपोर्ट रूसी तेल बेचकर मिल रहा है, जिस कारण ये जंग लंबी खींच रही है. ऐसे में अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया. प्रस्ताव के शुरुआत में रूसी तेल और गैस की खरीद जारी रखने वाले देशों पर 500% तक का टैरिफ लगाने की परिकल्पना की गई थी. इसका उद्देश्य उन देशों के लिए अमेरिकी बाजार तक पहुंच को लगभग खत्म कर देना था.
जनवरी 2026 में, ट्रंप ने दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा समर्थित एक विधेयक का समर्थन दिया. ग्राहम ने तर्क दिया कि इस धमकी से अमेरिकी राष्ट्रपति को भारत, चीन और ब्राजील पर दबाव बनाने का मौका मिलेगा, जिससे वे रियायती रूसी कच्चे तेल की खरीद कम करने के लिए मजबूर हो जाएंगे.
जब 100 फीसदी टैरिफ लगाने का रखा प्रस्ताव
हालांकि, बाद में 500 फीसदी का प्रस्ताव कायम नहीं रह सका. कानून के एक बाद के संस्करण ने रूसी ऊर्जा के प्रमुख खरीदारों को टारगेट करते हुए अधिकतम टैरिफ प्राधिकरण को घटाकर 100% कर दिया. अमेरिकी राष्ट्रपति रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों से आने वाले सामानों पर टैरिफ का उपयोग करके उन पर अपने खरीद व्यवहार को बदलने के लिए दबाव डाल सकते थे, लेकिन संभावित शुल्क पहले के प्रस्ताव की तुलना में काफी कम था.
18 सितंबर, 2026 को ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित ग्राहम अधिनियम ने रूसी ऊर्जा के विश्व के पांच सबसे बड़े आयातकों पर 100% तक टैरिफ लगाने को अधिकृत किया. इसने रूस पर प्रतिबंधों का विस्तार भी किया और मौजूदा प्रतिबंधों से बचने में शामिल संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान किया.
यह बदलाव भारत के लिए महत्वपूर्ण था, क्योंकि इस पैमाने का टैरिफ कच्चे तेल के आयात से कहीं ज्यादा प्रभावित कर सकता था. अमेरिका में एंट्री करने वाले भारतीय सामानों पर हाई टैरिफ एक्सपोर्ट्स पर दबाव डाल सकता था और द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं को जटिल बना सकता था.
फिर 100 फीसदी से शून्य क्यों किया टैरिफ?
अगला बदलाव 17 अक्टूबर को आया, जब ट्रंप ने ग्राहम अधिनियम के तहत छूट प्रावधान का इस्तेमाल किया. उनके कार्यकारी आदेश ने अमेरिकी राष्ट्रीय हितों का हवाला देते हुए कानून के तहत प्रतिबंधों, सीमाओं और शुल्कों के आवेदन को निलंबित कर दिया. इस आदेश ने न तो कानून को रद्द किया और न ही राष्ट्रपति के इसके इस्तेमाल के अधिकार को स्थायी रूप से समाप्त किया. इसके बजाय, फिलहाल रोक दिया, लेकिन बाद में उन्हें बहाल करने का विकल्प बरकरार रखा है.
