एशियाड में पहली बार ‘डबल धमाका’ कर भारतीय हॉकी ने रचा इतिहास, पुरुष टीम ने मलेशिया को 5-1 से रौंदा, LA ओलिंपिक का टिकट पक्का

रिकेट भारत का ‘धर्म’ है तो हॉकी खेलप्रेमियों के दिलों की धड़कन! एशियाड में सभी मेडल और गोल्ड मेडल विजेताओं को फ़ैन्स खूब सराह रहे हैं. लेकिन महिला और पुरुष क्रिकेट टीमों की जीत के साथ महिला और पुरुष हॉकी टीमों ने गोल्ड मेडल जीतकर जापान एशियाड में भारत की रौनक बढ़ा दी है. भारतीय महिला टीम ने चीन को तो भारतीय पुरुष टीम ने 2010 और 2018 की उपविजेता मलेशियाई टीम को 5-1 से हराकर हॉकी का गोल्ड अपने नाम कर लिया. इसके साथ ही भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों सीधे लॉस एंजेल्स ओलिंपिक 2028 का टिकट हासिल हो गया है.

गोल्डन जीत!
2010 और 2018 में मलेशियाई टीम ने भारतीय पुरुष टीम को सेमीफ़िनल में शिकस्त दी थी. इसलिए भारतीय टीम मलेशिया के ख़िलाफ़ इस अहम फ़ाइनल में इस बार सावधान होकर खेलती रही. भारत की ओर से कप्तान और ड्रैग फ़्लिकर हरमनप्रीत सिंह ने 11 मिनट में गोल कर भारत को 1-0 की बढ़त दिला दी. लेकिन मैच का पहला क्वार्टर ख़त्म होने से पहले मलेशिया के मिडफ़ील्डर सिल्वेरियस शेलो ने 14वें मिनट में स्कोर को 1-1 से बराबर कर दिया.

दूसरे क्वार्टर में ड्रैग फ़्लिकर जुगराज सिंह ने दिखाया कि पेनल्टी कॉर्नर में भारत की बेंच सिर्फ़ हरमनप्रीत सिंह पर ही आश्रित नहीं है. जुगराज सिंह ने एक तेज़ ड्रैग फ़्लिक के ज़रिये मलेशियाई गोलकीपर हफ़ीज़ुद्दीन ऑथमैन को मात देकर स्कोर को भारत के पक्ष में 2-1 कर दिया.

42वें मिनट में मलेशियाई-D गोलपोस्ट के ठीक बाहर में मिडफ़ील्डर आइमान रोज़ेमि की ग़लती की वजह से भारतीय टीम को पेनल्टी स्ट्रोक का मौक़ा मिला. टैलेंटेड मिडफ़ील्डर हार्दिक सिंह ने पेनल्टी स्ट्रोक को गोल में बदलने में कोई ग़लती नहीं की. भारत को 3-1 की बढ़त हासिल हो गई.
55वें मिनट में भारत का एक और गोल (4-1 की बढ़त)

इसके बाद 55वें मिनट में जुगराज के पेनल्टी कॉर्नर पर एक बार फिर मलेशिया के खिलाड़ी का पैर लगा. इसके बाद भारत ने वैरिएशन आजमाया, लेकिन रिटर्न पास पर दिलप्रीत सिंह गेंद को कंट्रोल नहीं कर सके. हालांकि अगले ही मूव पर भारत को सफलता मिल गई. डिफ्लेक्शन के बाद गेंद शिलानंद के पास पहुंची और उन्होंने नजदीक से कोई गलती नहीं की और शानदार गोल कर दिया.
57 वें मिनट में भारत की गोल्ड पर लगी मुहर! (स्कोर 5-1)

मैच खत्म होने में साढ़े तीन मिनट बाकी थे, तभी दिलप्रीत सिंह ने शानदार ड्रिब्लिंग से मलेशियाई डिफेंस को छकाया, इस दौरान उन्हें धक्का दिया गया, लेकिन अंपायर ने पेनल्टी कॉर्नर देने से इनकार कर दिया. भारत ने तुरंत रिव्यू लिया और फैसला उनके पक्ष में गया. इसके बाद पेनल्टी कॉर्नर पर भारत ने दिलचस्प रणनीति अपनाई और हार्दिक ने पुश किया, मनप्रीत ने स्टॉप किया और फिर हरमनप्रीत सिंह ने जोरदार हिट लगाई और भारत के खाते में पांचवा गोल आया और बढ़त 5-1 की हो गई.
बैंकाक एशियाड में महिला-पुरुष हॉकी टीमें फ़ाइनल खेलीं

शुक्रवार को भारतीय महिला हॉकी टीम ने चीन को 1-0 से हराकर रोमांचक फ़ाइनल जीता और 44 साल बाद एशियाड का गोल्ड जीत लिया. इससे पहले भारतीय पुरुष और महिला टीमें 1998 के बैंकाक एशियाड में एक साथ फ़ाइनल खेलीं थीं, जहां पुरुष टीम ने गोल्ड और महिला टीम ने सिल्वर मेडल जीता था. जापान एशियाड में भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों ने फ़ाइनल में प्रवेश किया और जीत भी हासिल की.
1982 में भारत हारा और बन गई ‘चक दे’!

1982 के दिल्ली एशियाड में भारतीय महिला हॉकी टीम ने द. कोरिया को हराकर गोल्ड जीता था. जबकि, भारतीय पुरुष टीम को पाकिस्तान ने 7-1 से हराकर गोल्ड जीता था जिसपर बाद में बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख़ खान अभिनीत ‘चक दे’ फ़िल्म बनी थी. जापान एशियाड में आख़िरकार भारत की पुरुष और महिला दोनों टीमों ने एक साथ गोल्ड मेडल जीतकर नया इतिहास कायम कर दिया है.

गोल स्कोरर:
भारत: हरमनप्रीत सिंह(11 मिनट), जगुराज सिंह(23 मिनट), हार्दिक सिंह (42 मिनट), शिलानंद (54 मिनट), हरमनप्रीत सिंह (57 मिनट)
मलेशिया: शेलो शिल्वेरियस (14 मिनट)

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