सांसद से तनातनी- ऑटो क्लस्टर में सफेदपोश स्वतंत्र निदेशक की नियुक्ति पर उठे सवाल, बोर्ड के गठन की वैधानिकता जांच के घेरे में

जमशेदपुर : आदित्यपुर ऑटो क्लस्टर में सफेदपोश स्वतंत्र निदेशक की नियुक्ति को लेकर उठे सवाल अब कंपनी के पूरे निदेशक मंडल के गठन और उसकी वैधानिक प्रक्रिया तक पहुंच गए हैं। पता चलता है कि जिस सफेदपोश व्यक्ति को स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया उसका एसिया तथा ऑटो क्लस्टर से शेयरधारक के रूप में जुड़ाव है। संबंधित अभिलेखों से यह संबंध और उसका स्वरूप प्रमाणित होता है। इस कारण स्वतंत्र निदेशक संबंधी कसौटियों के संदर्भ में नियुक्ति की समीक्षा की जरूरत बन गई है।
Companies Act, 2013, 2013 की धारा 149(6) स्वतंत्र निदेशक की स्वतंत्रता के लिए विभिन्न शर्तें निर्धारित करती है, जबकि धारा 149(7) के तहत स्वतंत्र निदेशक को अपनी स्वतंत्रता संबंधी घोषणा करनी होती है। धारा 166 निदेशक को कंपनी के हित में स्वतंत्र निर्णय लेने तथा ऐसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हित-संघर्ष से बचने की अपेक्षा करती है जो कंपनी के हितों से टकरा सकता हो।

130 सदस्यों की बैठक बुलाने का सवाल

ऑटो क्लस्टर के Articles of Association में निदेशक मंडल के गठन, नामांकन और चुनाव की वास्तविक व्यवस्था क्या है, यह अब जांच का महत्वपूर्ण विषय बन गया है। यह स्पष्ट है कि वर्तमान बोर्ड का गठन निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप नहीं हुआ है .अब कंपनी के सदस्यों की बैठक बुलाकर वैधानिक प्रक्रिया से बोर्ड के पुनर्गठन का हड़ा सवाल खड़ा होता है। उल्लेखनीय है कि आटो क्लस्टर में 130 सदस्य हैं। कंपनी प्रावधान में गलत प्रक्रिया पाये जाने पर जुर्माने का भी प्रावधान है।
केंद्र और राज्य सरकार के नामित पद भी सवालों में
उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऑटो क्लस्टर के गठन में भारत सरकार, झारखंड सरकार, तत्कालीन आयडा/वर्तमान जियाडा तथा एसिया से जुड़े योगदान की भूमिका रही है। आरोप यह भी है कि निर्धारित प्रतिनिधित्व के बावजूद भारत सरकार और झारखंड सरकार के नामित पद बोर्ड में लंबे समय से रिक्त रहे हैं। इन दावों की पुष्टि कंपनी के Articles, बोर्ड प्रस्तावों और MCA में उपलब्ध filings से होती है ।
फिलहाल जियाडा के एमडी के प्रतिनिधि के रूप में प्रेम रंजन के बोर्ड में निदेशक एवं चेयरमैन हैं। जियाडा के दूसरे पदेन प्रतिनिधि के रूप में वर्तमान आरडीडी (पूर्व आयडा सचिव )दिनेश रंजन की नियुक्ति की प्रक्रिया चलने की जानकारी सामने आई है।

*12 की अधिकतम क्षमता, फिलहाल 9 निदेशक*

बताया जा रहा है कि वर्तमान बोर्ड में कुल नौ निदेशक हैं, जबकि अधिकतम संख्या 12 तक हो सकती है। एसएन ठाकुर ऑटो क्लस्टर के एमडी हैं। बोर्ड में एसिया से जुड़े कई व्यक्तियों की मौजूदगी तथा एसिया के लिए निर्धारित प्रतिनिधित्व का वास्तविक अनुपालन भी जांच का विषय है।
*दो प्रोफेशनल डायरेक्टर का प्रावधान*
बोर्ड में दो प्रोफेशनल निदेशकों के प्रावधान के तहत आरके सिन्हा और अशोक कुमार गुप्ता, एमई स्कूल रोड, जुगसलाई, के नाम बताए जा रहे हैं। इनके अलावा तीन व्यक्तियों के स्वतंत्र निदेशक होने की जानकारी है।
*असली सवाल ‘इंडिपेंडेंस’ का*
पूरे विवाद का केंद्रीय प्रश्न यह है कि यदि कोई व्यक्ति ऑटो क्लस्टर अथवा उससे संबंधित शेयरधारक संस्था में ऐसा हित रखता है जो उसकी स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है, तो क्या वह Companies Act की स्वतंत्र निदेशक संबंधी कसौटियों को पूरा करता है?

*अब निगाह सदस्यों की बैठक पर*

नियुक्तियों में गंभीर प्रक्रियागत विसंगतियां सामने आने के बाद अब कंपनी के 130 सदस्यों की बैठक बुलाकर बोर्ड के गठन, प्रतिनिधित्व और भविष्य की नियुक्तियों पर वैधानिक निर्णय लेना ही कानूनी समाधान और अब तक हुई त्रुटि के लिए जुर्माना की अदायगी ही रास्ता दिखता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है-ऑटो क्लस्टर में निदेशक पदों का गठन कंपनी के Articles और Companies Act के अनुरूप हुआ है या प्रभावशाली हितों के आधार पर? केंद्र और राज्य सरकारों तथा जियाडा द्वारा ऑटो क्लस्टर बना कर उद्यमियों को सौंपा गया और इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया जिसका बेजा फायदा सफेदपोश ने उठाया। एसिया की तरह ऑटो क्लस्टर को भी अपनी जागीर समझने लगा।

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