संघ और सरकार देखे सफेदपोश का लबादा- दूसरे की जमीन पर कब्जा, ऑटो क्लस्टर में गैरकानूनी इंडिपेंडेंट डायरेक्टर नियुक्ति, उसे मैरिज हाल का स्वरूप, आदि कैसी नीति और कैसा संस्कार?

जमशेदपुर: संघ चरित्र, आदर्श, अनुशासन, कानून पालन, सज्जनता, निष्ठा, आदि सद्गुणों को लेकर राष्ट्र निर्माण में लगा संगठन है, लेकिन इससे जुड़ा कोई व्यक्ति, और वह भी एक प्रमुख स्तर का पदाधिकारी जो शायद किसी विशिष्ट योग्यता की बिना पर बिना आवश्यक प्रशिक्षण के ही उस पद पर नियुक्त हुआ हो, जब किसी दूसरे की जमीन पर घुसकर वृक्षारोपण, दूसरे की जमीन काट कर नाला का निर्माण जैसी दबंगई करे तो क्या कहा जाय? वृक्ष हटाने, नाला भरने के सक्षम प्राधिकरण के निर्देश का भी पालन न करे, अलबत्ता अपनी जमीन घेरने के लिए आने पर आवंटी के साथ वितंडा पैदा करा दे, उसे वहां नहीं आने की चेतावनी दे जिस पर वह आवंटी उसे बददुआ दे जो एक महिला हो तो क्या कहा जाय ? क्या सनातन में महिला के प्रति भारत माता की तरह सम्मान की भावना इसीलिए सिखाया जाता है ? आश्चर्य तो तब होता है जब भारत सरकार और जियाडा के महती तथा आम उद्यमियों के सामूहिक योगदान पर बने ऑटो क्लस्टर में भी अनीति पूर्वक निदेशक नियुक्त होने का मामला सामने आए। यह व्यक्ति उद्योग संगठन एसिया में है, ऑटो क्लस्टर में भी शेयर होल्डर है, फिर ऑटो क्लस्टर में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की हैसियत से कैसे नियुक्त है ? यह कंपनी लॉ और ऑटो क्लस्टर के मेमोरंडम एवं आर्टिकल का उल्लंघन है। यहां ऑटो क्लस्टर में औद्योगिक संगठन एसिया के दो नॉमिनी पहले से डायरेक्टर नियुक्त हैं। जो भी हो इंडिपेंडेंट डायरेक्टर तो ये श्रीमान हो नहीं सकते ,क्योंकि ऑटो क्लस्टर में शेयर और एसिया में पहले से पदधारी हैं । यह है इनकी ईमानदारी और नीति का नमूना ? ऑटो क्लस्टर को किस तरह मूल उद्देश्य से भटका कर मैरिज हॉल के रूप में इस्तेमाल हो रहा, टेंट वाले, सजावट वाले, कैटरिंग वाले से किस तरह कमीशन का धंधा पर्दे के पीछे चल रहा, जबकि इसके लिए बोर्ड ऑफ डायरेक्टर से न कोई प्रस्ताव पास होने की खबर है, न ही ऑटो क्लस्टर के मेमोरंडम में ऑटो क्लस्टर को इस तरह के व्यावसायिक मोड में चलाने का कोई प्रावधान है। कांग्रेस को लेकर कहा जाता था खाता न बही, केशरी जो कहें वही सही के तर्ज पर यहां काम हो रहा, जबकि यहां सरकार के नामित निदेशक गण भी हैं। भारत सरकार ने कम से कम 40 करोड़, आयडा( तत्कालीन) अब जियाडा ने कम से कम 10 करोड़ से अधिक और लगभग 42 एकड़ भूखंड नि:शुल्क ऑटो क्लस्टर निर्माण के लिए दिए ।आदित्यपुर और झारखंड के उद्योगों के विकास और अन्य तकनीकी सुविधाओं के लिए इसकी परिकल्पना की गयी, मैरिज हाल चलाने के लिए नहीं। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार ने तो पर्यटन विभाग के अधीन बहुत सारे होटल खोल रखे हैं।
इस प्रकार इस व्यक्ति के दोहरे चेहरे और सफेदपोश होकर माफियागिरी चलाने के अनेक खुलासे सामने आ रहे। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा साधन देकर यह संस्था उद्यमियों को सौंपी गयी , ताकि उनका उत्थान हो लेकिन इसका निजी प्रभाव में दुरुपयोग होने लगे तब क्या कहा जाय? अच्छा होता इस व्यक्ति को स्वमेव संघ छोडक़र सिर्फ तिकड़म से धंधे चलाना चाहिए या फिर संघ को इस प्रकार के आचरणों और जनता के बीच व्याप्त छवि के मद्दे नजर निर्णय लेते हुए कार्रवाई करना चाहिए । आज नहीं तो कल केंद्र और राज्य सरकारों के धन के बल पर बनी संस्था के दुरुपयोग का मामला जांच एजेंसियों के दायरे में आ ही सकता है तब तक बहुत देर हो चुकी होगी। निश्चित रूप से समाज में ऐसा व्यक्ति जो किसी समूह का प्रतिनिधित्व करता है, उसके विवादास्पद आचरणों और कार्यों से गलत संदेश ही नहीं जाता, आम लोगों खास कर किसी भी संगठन के सक्रिय कार्यकर्ताओं में हताशा, निराशा और काम के प्रति जोश में हीनता आती है। उल्लेखनीय है कि कोल्हान में अगर संघ परिवार वाली भाजपा कमजोर हुई है तो ऐसे दोहरे चरित्र वाले सफेदपोश की छवि और भूमिका का बहुत बड़ा हाथ है जो आदित्यपुर नगर निगम चुनाव में सामने दिखा भी जब इस सफेदपोश ने भाजपा की ओर से मेयर के अधिकृत प्रत्याशी संजय सरदार के साथ भितरघात किया जिसके प्रत्यक्षदर्शी राष्ट्रीय मंत्री सांसद प्रदीप वर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा रहे। जारी….

Share this News...