अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम में हेराफेरी के मामले में पुलिस ने आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है. जांच में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, सीडीआर, बैंक खातों, संपत्तियों, वाहनों, बरामदगी और गवाहों के बयानों को अहम सबूत बनाया गया है. पुलिस का दावा है कि चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी बैंक तक पहुंचने से पहले गणना कक्ष में ही हुई. जांच में CCTV के जरिए रकम हटाने या छिपाने की 105 घटनाओं की पहचान किए जाने की बात सामने आई है.
चार्जशीट 23 सितंबर 2026 को अयोध्या की विशेष एंटी करप्शन कोर्ट में दाखिल की गई. इसमें अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला उर्फ शनि, करुणेश पाण्डेय, मनीष कुमार यादव, लवकुश मिश्रा, रमाशंकर मिश्रा, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और सुभाष श्रीवास्तव को आरोपी बनाया गया है. चार्जशीट करीब 74 हजार पन्नों की बताई जा रही है.
CCTV में रकम हटाने और छिपाने की घटनाएं
जांच में सबसे अहम सबूत CCTV फुटेज को माना गया है. पुलिस के मुताबिक, फुटेज के विश्लेषण में गणना कक्ष में चढ़ावे की रकम को कथित तौर पर हटाने या छिपाने की 105 घटनाएं सामने आईं. जांच एजेंसी का कहना है कि इन घटनाओं को दूसरे डिजिटल और मौखिक साक्ष्यों के साथ मिलाकर देखा गया.
पुलिस की जांच का फोकस इस बात पर रहा कि मंदिर में जमा होने वाली नकदी की गिनती और उसे बैंक में जमा कराने के बीच क्या हुआ. जांच में बैंक तक रकम पहुंचाने की प्रक्रिया में चोरी के सबूत नहीं मिलने की बात भी सामने आई है. यानी पुलिस के मुताबिक कथित हेराफेरी का मुख्य चरण गणना कक्ष रहा.
बाथरूम से 2.25 लाख रुपये मिलने का भी जिक्र
चार्जशीट में 4 जून 2026 को गणना कक्ष के बाथरूम से 2.25 लाख रुपये बरामद होने की घटना का भी उल्लेख है. पुलिस के मुताबिक, चेकिंग शुरू होने के बाद रकम को बाथरूम में छिपाए जाने की बात सामने आई.
जांच में इस रकम का वीडियो बनाए जाने और उसे ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय को भेजे जाने का भी जिक्र है. चार्जशीट में चंपत राय समेत ट्रस्ट से जुड़े अन्य पदाधिकारियों के बयान शामिल किए गए हैं. रिपोर्टों के मुताबिक चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव को मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है, बल्कि उनके बयान गवाह के तौर पर दर्ज किए गए हैं.
मोबाइल चैट और CDR से साजिश की कड़ी जोड़ने का दावा
पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन से मिले डेटा और CDR को भी जांच का हिस्सा बनाया है. चार्जशीट के मुताबिक, कुछ आरोपियों के बीच कैश के बंडलों को रखने, छिपाने, बदलने और एक जगह से दूसरी जगह ले जाने से संबंधित बातचीत और संदेश मिले.
जांच एजेंसी का दावा है कि CCTV फुटेज, मोबाइल डेटा, CDR, गवाहों के बयान, बरामदगी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को एक साथ देखने पर आरोपियों के बीच कथित समन्वय और आपराधिक साजिश की तस्वीर सामने आती है.
करीब 79.85 लाख रुपये की नकदी बरामद
जांच के दौरान आरोपियों से करीब 79.85 लाख रुपये नकद बरामद किए जाने की बात सामने आई है. पुलिस ने अलग-अलग आरोपियों की निशानदेही पर नकदी के अलावा चांदी, सोने के आभूषण और अमेरिकी डॉलर भी बरामद किए. कुछ रकम बाथरूम, भूसे और उपलों के बीच छिपी होने की बात भी जांच में सामने आई.
पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों, जमा-निकासी, संपत्तियों, वाहनों और आभूषणों की भी जांच की. चार्जशीट में इन वित्तीय लेनदेन को कथित तौर पर चढ़ावे की रकम से जोड़कर देखा गया है.
जमीन, मकान और गाड़ियों की खरीद का भी ब्योरा
चार्जशीट में आरोपियों और उनके परिजनों के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों और वाहनों का भी विवरण शामिल है. पुलिस ने जमीन, मकान, कार, मोटरसाइकिल, आभूषण और दूसरे खर्चों की जांच की है.
जांच एजेंसी के मुताबिक, कुछ आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में बड़ी मात्रा में नकद जमा हुआ. इसके अलावा जमीन और मकान खरीदने, निर्माण कराने और वाहन खरीदने से जुड़े लेनदेन भी जांच के दायरे में आए.
पुलिस का दावा है कि इन संपत्तियों और खर्चों को कथित अपराध से हासिल रकम के संभावित इस्तेमाल से जोड़कर देखा गया है. हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में सबूतों की जांच के बाद ही होगी.
गणना कक्ष के प्रभारी पर भी लापरवाही का आरोप
चार्जशीट में गणना कक्ष के प्रभारी रहे सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका का भी उल्लेख है. पुलिस के अनुसार, उनकी जिम्मेदारी चढ़ावे की रकम की गिनती, बंडल तैयार कराने, जांच कराने और बैंक कर्मचारियों को रकम सौंपने की प्रक्रिया की निगरानी करना थी.
पुलिस का आरोप है कि निर्धारित SOP के बावजूद गणना कर्मचारियों की ठीक से चेकिंग और फ्रिस्किंग नहीं कराई गई. CCTV फुटेज में उनकी मौजूदगी के दौरान रकम हटाने की कुछ गतिविधियां दिखाई देने का भी दावा किया गया है.
SIT की जांच में करीब 190 गवाहों के बयान, बैंक रिकॉर्ड, संपत्तियों का विवरण, डिजिटल साक्ष्य और फोरेंसिक ऑडिट समेत कई तरह के दस्तावेज जुटाए गए हैं. जांच में मंदिर की बहुमूल्य दान सामग्री की भी जांच की गई. SIT ने सॉफ्टवेयर में दर्ज 803 कीमती दान वस्तुओं का भौतिक सत्यापन किया और उनमें कोई गड़बड़ी नहीं मिलने की बात कही है.
