सांसद से तनातनी –9 लबादा उद्योग हितैषी का और काम अड़ंगेबाजी का .. मे. टाटानगर इंटरप्राइजेज को 20 वर्षों से आवंटित जमीन पर कब्जा नहीं, कारण कौन?

 

जमशेदपुर, 4 सितंबर: मेसर्स टाटानगर इंटर प्राइजेज प्रा.लि. को 20 वर्षों में भी आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र के थर्ड फेज में आवंटित भूखंड पर कब्जा नहीं मिल सका है। जियाडा के क्षेत्रीय उपनिदेशक के कार्यालय के हवाले से प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त कंपनी को 30 हजार वर्गफुट भूखंड 17 जून 2006 को दिया गया । लेकिन आज तक इसका दखल कब्जा उद्यमी को नहीं मिला। गत नौ जनवरी 2026 को सरायकेला एसडीओ द्वारा प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी गम्हरिया सुनील कुमार चौधरी को दंडाधिकारी प्रतिनियुक्त करते हुए उक्त भूखंड का दखल दिलाने का आदेश जारी किया गया। आरआईटी थाना को भी एसडीओ ने निदेश दिया कि विधि व्यवस्था संधारित करें और सीओ गम्हरिया को भी वरीयता के आधार पर काम संपन्न कराने का जिम्मा दिया गया।
एसडीओ ने पर्याप्त संख्या में सशस्त्र महिला एवं पुरुष बल तथा पुलिस पदाधिकारी की प्रतिनियुक्ति कर दखल दिलाने का निदेश दिया था। तदनुसार 10 जनवरी को उक्त पदाधिकारी आरआईटी थानेदार के साथ गये लेकिन दखल का काम पूरा नहीं हो सका क्योंकि 40-50 पुरुष एवं महिलाओं ने पहुंचकर काम बाधित कर दिया। तब से आज तक मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। पुन: मेसर्स टाटानगर इंटर प्राइजेज प्रा.लि.की ओर से गत 12 जुलाई को मुख्यमंत्री ,डीसी, एसडीओ सहित तमाम उच्चाधिकारियों को एक ज्ञापन देकर दखल दिलाने की प्रार्थना की गई और कहा गया कि इसमें अगर कोई शासकीय शुल्क भी लगे तो वह चुकाने को तैयार हैं ताकि पर्याप्त सशस्त्र पुलिस बल की तैनाती कर उन्हें दखल दिलाया जा सके। यह भूखंड थर्ड फेज में बी -50 पी एवं बी -51 पी (पी) के नंबर से अंकित है।
पता चला है कि 20 वर्षों से दखल नहीं होने के पीछे उस सफेदपोश माफिया का ही हाथ है। इस प्लाट को वह हर हाल में काबिज करना चाहता है, क्योंकि इससे उसका तत्काल साम्राज्य विस्तार होगा । यह मामला ठीक उसी तरह है जैसे प्रधानमंत्री चीन के बारे में विस्तारवादी नीतियों को अपने वक्तव्यों में बता चुके हैं। इस विषय में एसिया और लघु उद्योग भारती की औकात समझ में आ रही है जिनका गठन उद्योग -उद्यमी हित के लिए हुआ। पिछले लगातार अनेक वर्षों से एसिया के निर्विरोध अध्यक्ष बनने वाले पदाधिकारी भी इस मामले पर चुप हैं। यह क्षेत्र लघु उद्योग भारती के केंद्रीय सचिव का ही है। लघु उद्योग भारती ने उनकी काबिलियत को देखते हुए उन्हें पैराशूट की तरह ऊपर से जमशेदपुर लघु उद्योग भारती ,अदित्यपुर के प्रभार में उतार दिया था। यह है उनकी काबिलियत, उल्टे इस पैराशूट लांचिंग के कारण उद्योग भारती तार -तार हुआ और एक तीसरा संगठन बन गया जो अलग विषय है। फिलहाल ” लघु उद्योग “भारती और “एसिया” के क्रमश: पैराशूटर और निर्विरोध सर्वप्रिय कर्त्ता धर्ता के होने के बावजूद एक उद्यमी 20 सालों से दखल के लिये दर- दर की ठोकरें क्यों खा रहा है? यह है उस सफेदपोश कारोबारी की रीति-नीति जो किसी को पनपने देना नहीं चाहता और एसिया तथा लघु भारती को जेब में रखता है । जारी…..

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