JPSC धांधली: वाट्सऐप पर शेयर होती थी OMR शीट की जानकारी, जानिए श्वेता गुप्ता और ख्यांगते की पूरी कहानी

 

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं की सीआईडी जांच में लगातार बड़े खुलासे हो रहे हैं। जांच में सामने आया है कि अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने में तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष एल. ख्यांगते और पूर्व परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता की मुख्य भूमिका रही।

टीडीपीएल कंपनी के निदेशक रामबीर सिंह और श्वेता गुप्ता के बयानों से साफ हुआ है कि आयोग के भीतर अधिकारियों और सदस्यों के बीच आपसी मनमुटाव का असर सीधे परीक्षा परिणामों पर पड़ रहा था। इसके अलावा, ओएमआर शीट में हेरफेर की जानकारी पहले से होने के बावजूद परिणाम जारी किए गए।
श्वेता गुप्ता पर तत्कालीन चेयरमैन की विशेष मेहरबानी
सीआईडी जांच के अनुसार, तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष एल. ख्यांगते की श्वेता गुप्ता पर खास मेहरबानी थी।

नियमित परीक्षा नियंत्रकों के छुट्टी पर जाने या तबादले के बावजूद श्वेता गुप्ता को ही परीक्षा नियंत्रक का लिखित प्रभार सौंपा जाता रहा। श्वेता गुप्ता और सुमंत तिर्की की देखरेख में ही 11वीं से 13वीं जेपीएससी का परिणाम जारी किया गया। श्वेता ने स्वीकार किया कि पीटी और मुख्य परीक्षा की प्रक्रिया में शामिल न होने के कारण वे परिणाम जारी नहीं करना चाहती थीं, लेकिन अध्यक्ष के निर्देश पर इंटरव्यू के अंक जोड़कर परिणाम क्लीयरेंस के लिए भेजा गया।
आयोग के सदस्यों में खींचतान से डॉ जमाल नाराज
टीडीपीएल निदेशक रामबीर सिंह के अनुसार, सदस्य डॉ जमाल अहमद पूर्व परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता से सख्त

नाराज रहते थे।

तबादले के बाद भी श्वेता गुप्ता का आयोग में बने रहना डॉ जमाल और अन्य सदस्यों के विरोध की मुख्य वजह

था।

नाराजगी के कारण डॉ जमाल अहमद कई बार आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं के परिणामों पर हस्ताक्षर करने से मना कर देते थे।

हजारीबाग के अभ्यर्थियों के चयन में डॉ जमाल का प्रभाव था, लेकिन कोडिंग के कारण उनके मनपसंद अभ्यर्थियों का चयन नहीं हुआ।

अधिकारियों और सदस्यों के बीच इसी खींचतान और विवाद के कारण परीक्षा परिणाम समय पर जारी नहीं हो पाते थे।
OMR शीट में हेरफेर की श्वेता को थी जानकारी
सीआईडी को दिए गए बयान में रामबीर सिंह ने बड़ा दावा किया है कि एसीएफ, एफआरओ इंटरव्यू और 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा में धांधली की पूरी जानकारी श्वेता गुप्ता को पहले से थी। ओएमआर शीट के मूल्यांकन से पहले ही वाट्सऐप से टीडीपीएल के कर्मचारियों उस्मान और पीके सिंह के साथ सूचनाएं साझा की जाती थीं।

इसका मुख्य उद्देश्य ओएमआर शीट और ओएसएम प्रणाली में आसानी से हेरफेर और गड़बड़ी को अंजाम देना था।
आंतरिक कलह से अटका अभ्यर्थियों का भविष्य
जांच में यह साफ हो गया है कि JPSC के भीतर चल रही अंदरूनी गुटबाजी और मनमर्जियों की वजह से पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह बाधित हो गई थी। अध्यक्ष और परीक्षा नियंत्रक के बीच की मिलीभगत और अन्य सदस्यों के विरोध के कारण आयोग की विश्वसनीयता पर गहरे सवाल खड़े हो गए हैं। फिलहाल सीआईडी इस मामले में शामिल अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के वाट्सऐप चैट और दस्तावेजों की जांच कर आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।

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