संसद के मॉनसून सत्र के आठवें दिन बुधवार को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (गलत तरीकों से बचाव) अमेंडमेंट बिल, 2026 पर चर्चा समाप्त हो गई. लोकसभा से यह बिल पारित हो गया. इससे पहले मंगलवार को भी देर रात तक इस बिल पर बहस हुई. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भाषण दिया. इस दौरान उन्होंने आरएसएस और गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा. इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष के नेता द्वारा इस्तेमाल किए गए असंसदीय शब्द को हटाने का अनुरोध किया. राज्यसभा में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा.
वंदे मातरम् के विरोध का मतलब ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे गैंग’ का मनोबल बढ़ाना है : गृह राज्य मंत्री राय
राज्यसभा में बुधवार को गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की नीति के कारण राष्ट्रगीत का विरोध करने का आरोप लगाया और कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के विरोध का मतलब ‘‘भारत तेरे टुकड़े होंगे गैंग’’ के मनोबल को बढ़ाना है.
उच्च सदन में राय ने यह बात राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कही. उनके जवाब के बाद सदन ने इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया.
गृह राज्य मंत्री के जवाब और विधेयक पारित किए जाने से पहले कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के सदस्यों ने सदन में गृह मंत्री अमित शाह की अनुपस्थिति सहित विभिन्न मुद्दों पर विरोध जताते हुए सदन से वॉक आउट किया था.
विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए राय ने कहा कि यह कोई सामान्य विधायी संशोधन विधेयक नहीं बल्कि भारत की आत्मा, राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों के प्रति हम सभी की प्रतिबद्धता है.
राय ने कहा, ‘‘वंदे मातरम् का विरोध करने का मतलब है कि कांग्रेस हमेशा तुष्टीकरण की नीति को अपना कर इस देश के गौरव को अपमानित करने का काम करती रही है.’’
राय ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल वंदे मातरम् का विरोध क्यों कर रहे हैं, यह समझ में न आने वाली बात है तथा इस विरोध को देश के बेटे-बेटियां देख रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘‘वंदे मातरम् के विरोध का मतलब भारत तेरे टुकड़े होंगे गैंग के मनोबल को बढ़ाना है.’’
उन्होंने आगाह किया कि ‘‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’’ नारे को अब देश का नौजवान, किसान, महिलाएं, मजदूर बर्दाश्त नहीं करेंगे और भारत के लोग इनको सबक सिखाएंगे.
उन्होंने कहा कि 1971 के राष्ट्र गौरव अपमान निवारण अधिनियम के माध्यम से संविधान, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्र गान जन-गण-मन के सम्मान की सुरक्षा सुनिश्चित की गयी थी. उन्होंने कहा कि वर्तमान संशोधन विधेयक का उद्देश्य वंदे मातरम् गीत का जानबूझ कर किए गए अपमान को उसी प्रकार दंडनीय बनाना है.
राय ने कहा कि 1875 में ऋषि बंकिमचंद्र चटर्जी ने वंदे मातरम् गीत की रचना की थी. उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य की बात है कि जब 1937 में जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस के अध्यक्ष बने तो उन्होंने वंदे मातरम् को केवल दो अंतरों तक सीमित कर दिया.
गृह राज्य मंत्री ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने पंद्रह अगस्त 1947 को सुबह साढ़े छह बजे ऑल इंडिया रेडियो पर पंडित ओंकारनाथ ठाकुर से पूरे वंदे मातरम् गीत का गायन करवाया था और इसके साथ ही देश के प्रथम स्वतंत्रता दिवस का ‘शुभारंभ’ हुआ.
उन्होंने कहा कि 24 जनवरी 1950 को डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने संविधान सभा में कहा था कि वंदे मातरम् का जन-मन-गण के समान ही सम्मान किया जाएगा और उसका दर्जा भी समान होगा.
विधेयक के प्रावधानों के तहत राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन के दौरान किसी भी तरह का व्यवधान या उसका अपमान आपराधिक कृत्य माना जाएगा और इसके लिए तीन वर्ष तक की सजा हो सकती है.
