चलती ई-रिक्शा में गूंजी जुड़वा बच्चों की किलकारी, एएनएम प्रियंका कुमारी की सूझबूझ से सुरक्षित प्रसव

 

 

झुमरीतिलैया – मानवता, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा का एक प्रेरणादायक उदाहरण सीएच स्कूल रोड पर देखने को मिला, जब एक एएनएम की तत्परता और सूझबूझ ने न केवल एक प्रसूता की जान बचाई, बल्कि जुड़वा बच्चों का सुरक्षित जन्म भी सुनिश्चित किया। इस घटना की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।
जानकारी के अनुसार, एएनएम प्रियंका कुमारी अपने निजी कार्य से सब्जी खरीदने निकली थीं। इसी दौरान उन्हें सूचना मिली कि एक गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई है और उसे अस्पताल ले जाया जा रहा है। महिला एक ई-रिक्शा में सवार थी, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी प्रसव पीड़ा अत्यधिक बढ़ गई।
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए प्रियंका कुमारी ने बिना समय गंवाए ई-रिक्शा में ही प्रसव की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने उपलब्ध संसाधनों और अपने चिकित्सकीय अनुभव का उपयोग करते हुए पूरी सावधानी और कुशलता के साथ महिला का सुरक्षित प्रसव कराया। आश्चर्यजनक रूप से महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। प्रसव के बाद दोनों नवजात और उनकी मां पूरी तरह सुरक्षित पाए गए।
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने एएनएम प्रियंका कुमारी की सराहना करते हुए कहा कि यदि उन्होंने समय रहते साहस और समझदारी नहीं दिखाई होती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। उनकी तत्परता और सेवा भावना ने एक बड़े संकट को टाल दिया।
प्रसव के उपरांत मां और दोनों नवजातों को बेहतर चिकित्सकीय देखभाल के लिए अस्पताल भेज दिया गया, जहां उनकी स्वास्थ्य जांच की गई। चिकित्सकों के अनुसार मां और दोनों बच्चे स्वस्थ हैं।
इस घटना ने यह साबित कर दिया कि स्वास्थ्यकर्मियों की सजगता और समर्पण समाज के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। एएनएम प्रियंका कुमारी का यह मानवीय कार्य न केवल स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रियंका कुमारी को उनकी उत्कृष्ट सेवा, साहस और मानवता के लिए सम्मानित किए जाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि ऐसे समर्पित स्वास्थ्यकर्मी ही समाज के वास्तविक नायक होते हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करते हैं।

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