रामगढ़ सड़क हादसा: आठ की मौत , फूटा गुस्सा, शव सड़क पर रखकर NH-23 किया जाम, हजारों वाहन जाम में फंसे

 

रामगढ़: 25 जून की रात, एक सवारी गाड़ी में आठ लोग सवार होकर बिहार के मुजफ्फरपुर के लिए निकले. सभी ताशा बजाने वाले थे. मुजफ्फरपुर में किसी की खुशियों में वे ताशे बजाने जा रहे थे. लेकिन उन्हें क्या पता था कि वहां पहुंचने से पहले उनकी ही खुशियों को ग्रहण लग जाएगा. गाड़ी कुछ दूर ही चली थी. रामगढ़ थाना क्षेत्र के लारी-बरलौंग के पास जैसे ही गाड़ी पहुंची, अचानक सबकुछ बदल गया. जो कमाने के लिए घर से विदा लेकर निकले थे, उन्होंने खुद ही दुनिया से विदा ले ली.

लारी-बरलौंग के पास कोयला लदे एक ट्रक ने इनकी सवारी गाड़ी में जोरदार टक्कर मार दी. टक्कर इतनी भयानक थी कि गाड़ी में बैठे आठ लोगों में से सात की तो अस्पताल ले जाते वक्त ही मौत हो गई. वहीं गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति ने अस्पताल में दम तोड़ दिया. सभी शवों का रामगढ़ सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम किया गया.

शुक्रवार को रामगढ़ सदर अस्पताल का पोस्टमार्टम हाउस हादसे में मृतकों के परिजनों के दर्द और चीख-पुकार का गवाह बना रहा. हर परिवार की जुबान पर अपने बेटे, भाई या पति की आखिरी बात थी और हर आंख में एक ऐसा सवाल, जिसका जवाब किसी के पास नहीं है. अनोद कुमार, डेविड करमाली, पप्पू करमाली, पवन करमाली, अशोक डोम, शक्ति डोम, हेमंत कुमार महतो, मनीष कुमार..ये वो लोग हैं जिनकी इस हादसे ने जान ले ली.

जिले में हुए दर्दनाक सड़क हादसे के बाद परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा. हादसे में जान गंवाने वाले सात लोगों के शवों को रामगढ़-बोकारो मुख्य मार्ग (NH-23) पर मरांग मर्चा के पास सड़क पर रखकर ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. इस दौरान सड़क पर एम्बुलेंस और शव रखकर कई घंटों तक जाम लगाया गया, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और हजारों लोग जाम में फंस गए.

तब तक आंदोलन जारी रहेगा.

यह प्रदर्शन रजरप्पा थाना क्षेत्र के बोरिंविंग गांव के पास किया गया. मृतकों के परिजन और स्थानीय लोग सरकार और प्रशासन से उचित मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, बच्चों की शिक्षा और आवास की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.

भारी परेशानी का सामना करना पड़ा

प्रदर्शन में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता भी शामिल हुए और उन्होंने मृतकों के परिजनों की मांगों का समर्थन किया. सड़क जाम होने से रामगढ़-बोकारो मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया. कई यात्री घंटों तक जाम में फंसे रहे, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा.

उचित कार्रवाई की जाएगी

मामले की सूचना मिलने के बाद रामगढ़ जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची. अधिकारी लगातार प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों और मृतकों के परिजनों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे हैं. प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि उनकी मांगों पर नियमानुसार विचार किया जाएगा और उचित कार्रवाई की जाएगी.

पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

फिलहाल प्रदर्शन जारी है और रामगढ़-बोकारो मुख्य मार्ग पर यातायात बाधित है. प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जाम समाप्त कराने के प्रयास किए जा रहे है. पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना न हो.

शादी के दो महीने बाद ही उजड़ गया हेमंत का संसार

हजारीबाग जिले के कटहरवा गांव के रहने वाले 25 वर्षीय हेमंत कुमार महतो ने अभी दो महीने पहले ही वैवाहिक जीवन की शुरुआत की थी. उनके चाचा रघुनंदन महतो बताते हैं कि गुरुवार शाम करीब साढ़े सात बजे हेमंत ने कहा था कि मुजफ्फरपुर के कार्यक्रम से लौटकर मुलाकात होगी. किसे पता था कि वही मुलाकात आखिरी साबित होगी. सुबह हादसे की सूचना मिलते ही घर का माहौल मातम में बदल गया. मां सुभद्रा देवी बेटे की मौत की खबर सुनते ही बेसुध हो गईं और नई-नवेली दुल्हन की दुनिया तो पल भर में ही उजड़ गई.

तीन महीने का बेटा अपने पिता को अब तस्वीरों में ढूंढेगा

31 वर्षीय अनोद कुमार अपने परिवार के लिए ताशा बजाकर आजीविका चलाते थे. उनके जीजा रॉबिन महतो के अनुसार, वह जल्द लौटने की बात कहकर कार्यक्रम के लिए निकले थे. पीछे पत्नी सुषमा देवी, चार वर्षीय बेटी सनम कुमारी और तीन महीने का बेटा रह गया है. पिता की गोद का एहसास पाने से पहले ही मासूम के सिर से उसका साया उठ गया.

 

एक टक्कर… और कई परिवारों की खुशियां खत्म

लारी-बरलौंग के पास हुआ यह हादसा केवल आठ मौतों का आंकड़ा नहीं है. यह उन परिवारों का दर्द है, जिनके घर का कमाने वाला सदस्य चला गया, जिनकी नई गृहस्थी शुरू होते ही खत्म हो गई और जिन बच्चों ने अपने पिता को हमेशा के लिए खो दिया.

Share this News...