झारखंड में मॉनसून की बेरुखी,सूखे की आहट: सामान्य से 60% कम वर्षा ,धान की रोपाई और बीज डालने का काम बुरी तरह प्रभावित

 

Ranchi: झारखंड में मॉनसून की सुस्त रफ्तार ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं. जून का महीना बीतने को है और मॉनसून की लगातार बेरुखी के कारण खेतों में दरारें पड़ रही हैं, जिससे धान की रोपाई और बीज डालने का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की रिपोर्ट के मुताबिक, जून में राज्य में सामान्य 122.6 मिलीमीटर के मुकाबले सिर्फ 49.5 मिलीमीटर वर्षा हुई है. इस दौरान राज्य में सामान्य से 60 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है, जिसके चलते पूरा झारखंड अल्प वर्षा की गंभीर श्रेणी में बना हुआ है.

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, चतरा जिले में 100 प्रतिशत का डेफिसिट दर्ज किया गया है, जबकि पलामू में 95 प्रतिशत और लोहरदगा में 91 प्रतिशत की भारी कमी देखी जा रही है. गढ़वा और साहिबगंज जिले भी सूखे जैसी स्थिति से प्रभावित हैं, जहां क्रमशः 99 प्रतिशत और 98 प्रतिशत तक बारिश की कम हुई है. इसके विपरीत, राजधानी रांची एकमात्र ऐसा जिला है, जहां सामान्य से 51 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज है. राज्य के कुल 16 जिलों में सामान्य से 60 प्रतिशत कम वर्षा हुई है. मिट्टी में नमी की कमी के कारण किसान खेतों को तैयार करने में असमर्थ हैं, जिससे खरीफ फसलों के उत्पादन में भारी गिरावट का खतरा मंडरा रहा है.

राष्ट्रीय स्तर पर भी कमजोर मॉनसून का असर साफ दिख रहा है, जिससे केंद्र सरकार की चिंताएं बढ़ी हुई हैं. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक उच्च स्तरीय बैठक में जानकारी दी कि चालू सीजन में देश के भीतर अब तक कुल 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज है. इस स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने देश के 315 जिलों को कृषि संकट से प्रभावित होने वाले संभावित क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया है.

इन जिलों को सिंचाई की सुविधाओं के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया है, जिसमें 111 अत्यधिक संवेदनशील (हाई-प्रायोरिटी) जिले हैं, जहां सिंचाई सुविधा 25 प्रतिशत से भी कम है. इसके अलावा 76 जिले मध्यम-प्रायोरिटी और 128 जिले कम खतरे वाली श्रेणी में शामिल हैं. कृषि मंत्रालय ने प्रभावित राज्यों को जल संरक्षण तेज करने और आकस्मिक जिला योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं ताकि किसानों को इस मौसमी मार से बचाया जा सके.

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