भारत की तेल आयात नीति पर क्या बोले मार्को रुबियो
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत का तीन दिवसीय दौरा पूरा कर अमेरिका वापस लौट गए हैं। हालांकि, स्वदेश रवाना होने से पहले मार्को रुबियो ने भारत की तेल आयात की रणनीति पर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि भारत कच्चे तेल के आयात के स्रोतों में विविधता रखे हुए है और यह उसकी सफल रणनीति है। उन्होंने दो टूक कहा कि भारत का यह विविधता भरा कदम उसके अपने हितों से प्रेरित है, न कि अमेरिकी दबाव के कारण ऐसा है। एक तरह से भारत की तेल आयात नीति की तारीफ करते हुए रुबियो ने इस बात पर जोर दिया कि किसी एक ही आपूर्तिकर्ता पर बहुत अधिक निर्भर रहने से देशों के लिए आपूर्ति में रुकावट आने का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने पर लगाए गए टैरिफ की ओर भी इशारा किया, जो नाकाम रहा था।
बातचीत में रुबियो ने कहा, “भारत ने अपने ऊर्जा पोर्टफोलियो में विविधता लाने की दिशा में काफी प्रगति की है। ऐसा उसने किसी धमकी या इस तरह के किसी दबाव के कारण नहीं किया है।” यह मुद्दा भारत के लिए विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के साथ मतभेद रहे हैं। बता दें कि अमेरिकी विदेश मंत्री 20 अक्टूबर को मुंबई पहुंचे थे। उनकी इस यात्रा का उद्देश्य ऊर्जा, व्यापार एवं निवेश, रक्षा और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाना तथा पश्चिम एशिया संकट पर विचारों का आदान-प्रदान करना था।
रूस से भारत की तेल खरीद पर अमेरिका का रुख
बता दें कि पिछले साल, ट्रंप ने नई दिल्ली द्वारा रूस से तेल खरीदने का हवाला देते हुए भारतीय सामानों पर 25% का अतिरिक्त शुल्क लगा दिया था, जिससे कुल शुल्क बढ़कर 50% हो गया था। वॉशिंगटन का दावा था कि इससे मिलने वाली कमाई यूक्रेन में रूस के युद्ध को जारी रखने में मदद कर रही है। ट्रंप के सहयोगी पीटर नवारो ने तो भारत को “क्रेमलिन के लिए लॉन्ड्रोमैट” (मनी लॉन्ड्रिंग का जरिया) तक कह दिया था। हालांकि, इस साल की शुरुआत में यह अतिरिक्त शुल्क हटा लिया गया था।
भारत 41 देशों से करता है तेल आयात
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया जब भारत ने भू-राजनीतिक तनाव के बीच अपने कच्चे तेल के आयात का दायरा बढ़ाया है। हालांकि रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। आंकड़ों से पता चलता है कि भारत की कुल तेल खरीद में रूस की हिस्सेदारी 46.6% से घटकर 33.5% रह गई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य-पूर्व के देशों से कच्चे तेल का आयात काफी बढ़ गया है। पिछले हफ्ते, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने बताया कि भारत, जो अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 80% से अधिक हिस्सा आयात करता है, ने अपने आपूर्ति नेटवर्क का विस्तार करते हुए इसे 27 देशों से बढ़ाकर 41 देश कर लिया है।
भारत के फैसले राष्ट्रीय हितों से प्रेरित
सरकार का हमेशा से यही कहना रहा है कि ऊर्जा खरीद से जुड़े भारत के फैसले राष्ट्रीय हितों से प्रेरित होते हैं, और इनका उद्देश्य अपने नागरिकों के लिए किफायती और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करना है। रुबियो ने कहा कि भारत की इस रणनीति को केवल रूस से तेल आयात कम करने की कोशिश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह रूस से कम तेल खरीदने के बारे में उतना नहीं है, जितना कि अमेरिका, वेनेजुएला या पश्चिमी गोलार्ध के अन्य देशों से अधिक कच्चा तेल खरीदने के बारे में है। मुझे लगता है कि यह भारत के हित में है और जाहिर है कि हम इसमें मदद करना चाहते हैं।”
