शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर जमशेदपुर के घोड़ाबांधा, टेल्को स्थित श्री साईनाथ देवस्थानम में 16 अक्टूबर महाषष्ठी के दिन शास्त्रीय नृत्य कार्यक्रम ‘रूपं देहि – जयं देहि’ का भव्य आयोजन किया गया। साई परिवार विश्व सेवा संस्थान, जमशेदपुर के तत्वावधान में आयोजित इस विशेष सांस्कृतिक संध्या में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की विविध विधाओं के माध्यम से भक्ति, साधना और भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा का मनोहारी संगम देखने को मिला।
मां दुर्गा की आराधना को समर्पित इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय नृत्य की गौरवशाली विरासत को प्रोत्साहित करना तथा नृत्य के माध्यम से शक्ति, सौंदर्य और आध्यात्मिक चेतना की अभिव्यक्ति करना था। भक्तिमय वातावरण में आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में कलाकारों ने अपनी साधना, भावाभिव्यक्ति, लयकारी और उत्कृष्ट नृत्य कौशल से उपस्थित श्रद्धालुओं एवं कला प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की प्रमुख प्रस्तुतियों में कोलकाता की प्रतिभाशाली कथक नृत्यांगना सौमिली घोष की प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उन्होंने देवी स्तुति से अपनी प्रस्तुति का शुभारंभ किया और भावपूर्ण नृत्याभिव्यक्ति के माध्यम से मां दुर्गा के प्रति अपनी श्रद्धा एवं समर्पण व्यक्त किया। कथक की पारंपरिक शैली, आकर्षक पद संचालन, लयकारी और भावों की सजीव अभिव्यक्ति ने उनकी प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाया। उन्होंने ‘भवानी दायनी’ के साथ अपनी प्रस्तुति का समापन किया। उनकी नृत्य प्रस्तुति में भक्ति और शास्त्रीय सौंदर्य का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
इसके पश्चात झारखंड के सिनी से आईं भरतनाट्यम नृत्यांगना अंकिता रॉय ने अपनी प्रस्तुति से दक्षिण भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा की गरिमा को मंच पर साकार किया। उनकी सुस्पष्ट मुद्राओं, भाव-भंगिमाओं और अनुशासित नृत्य शैली ने दर्शकों को आकर्षित किया। उन्होंने ‘दुर्गा माहेश्वरी’ एवं ‘गोकुल निरयल’ की प्रस्तुति के माध्यम से कार्यक्रम में आध्यात्मिक भाव और कलात्मक विविधता का विशेष रंग भरा।
वहीं, जमशेदपुर के कथक कलाकार तुषार दास ने देवी स्तुति और ‘गुरु चरण’ पर आधारित अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों के समक्ष कथक की भावपूर्ण एवं लयात्मक विशेषताओं को प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति में गुरु परंपरा के प्रति सम्मान, नृत्य साधना और भक्ति की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। उनकी कलात्मक अभिव्यक्ति ने सांस्कृतिक संध्या को और भी गरिमामय बनाया।
‘रूपं देहि – जयं देहि’ का भाव मां दुर्गा से रूप, शक्ति, सामर्थ्य और विजय का आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रार्थना से जुड़ा है। इसी आध्यात्मिक भावना को केंद्र में रखते हुए कार्यक्रम में शास्त्रीय नृत्य को केवल मनोरंजन का माध्यम न मानकर साधना, उपासना और आत्मिक अनुभूति की अभिव्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रत्येक प्रस्तुति ने भारतीय संस्कृति में निहित भक्ति भाव और कलात्मक अनुशासन की महत्ता को रेखांकित किया।
इस आयोजन की विशेषता यह रही कि कथक और भरतनाट्यम जैसी शास्त्रीय नृत्य विधाओं को एक मंच पर प्रस्तुत कर भारतीय सांस्कृतिक विविधता और एकता का संदेश दिया गया। ऐसे सांस्कृतिक आयोजन न केवल नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं, बल्कि भारतीय शास्त्रीय कलाओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
साई परिवार विश्व सेवा संस्थान, जमशेदपुर द्वारा आयोजित ‘रूपं देहि – जयं देहि’ शारदीय नवरात्रि महोत्सव की एक विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुति रही। भक्ति, कला और परंपरा के इस सुंदर समन्वय ने महाषष्ठी की संध्या को यादगार बनाया तथा मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और भारतीय शास्त्रीय नृत्य के प्रति सम्मान की भावना को सशक्त रूप से अभिव्यक्त किया।
