1980,1982,1983 और अब; सोनिया गांधी वोटर लिस्ट केस में 46 साल बाद क्या आएगा नया मोड़?

नई दिल्ली:भारतीय नागरिकता मिलने से तीन साल पहले 1980 में मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के मामले में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी का नाम 1983 में भारतीय नागरिकता हासिल करने से तीन साल पहले वोटर लिस्ट में शामिल किए जाने के मामले में FIR दर्ज करने के अनुरोध संबंधी याचिका पर फिर से सुनवाई का रास्ता साफ कर दिया। सत्र अदालत ने मजिस्ट्रेट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें गांधी के खिलाफ आरोपों की जांच का आदेश देने से इनकार कर दिया गया था। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने का यह आदेश राउज एवेन्यू अदालतों की सेंट्रल दिल्ली कोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अधिवक्ता विकास त्रिपाठी की ओर से दायर शिकायत पर मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश के खिलाफ दाखिल पुनरीक्षण याचिका पर आया। अदालत के फैसले के बाद BJP ने कांग्रेस पर निधाना साधा है।

अब यह मामला एक बार फिर आया सामने

इससे पहले वकील विकास त्रिपाठी ने मजिस्ट्रेट के पास जाकर वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों की जांच और FIR दर्ज करने की मांग की थी। मजिस्ट्रेट ने सितंबर 2025 में इस अर्जी को खारिज कर दिया था। उस फैसले को चुनौती देते हुए त्रिपाठी ने सेशन कोर्ट में एक पुनरीक्षण याचिका दायर की। अब कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर दिया है और मामले पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया है।

संसदीय लोकतंत्र में हर नागरिक के लिए मतदाता सूची की पवित्रता एक अटूट विश्वास का विषय है। देश का सबसे ताकतवर व्यक्ति भी एक मतदाता या नागरिक के तौर पर कम प्रभावशाली लोगों के बराबर ही होता है।
आदेश के महत्वपूर्ण हिस्सों को मौखिक रूप से पढ़ते हुए न्यायाधीश ने कहा कि अदालत के आदेश में कानून के प्रति निष्ठा होनी चाहिए, न कि तथ्यों के साथ खिलवाड़। इस कसौटी पर जब यह न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) की ओर से पारित किए गए इस आदेश को देखता है, तो इसमें खामियां पाता है।

नए आदेश का क्या है मतलब

सोमवार को आया आदेश सिर्फ शिकायत पर आगे न बढ़ने के पुराने फैसले को रद्द करता है और मजिस्ट्रेट को निर्देश देता है कि वे ठोस वजहों के साथ आदेश जारी करके इस पर फिर से विचार करें। मजिस्ट्रेट के सामने अगली सुनवाई 29 सितंबर को होनी है। मजिस्ट्रेट को संबंधित पक्षों की बात सुनने और सेशंस कोर्ट के निर्देशों के अनुसार प्रक्रिया का पालन करने के बाद शिकायत पर नए सिरे से विचार करना होगा।

याचिका में वकील की ओर से क्या आरोप

विकास त्रिपाठी की शिकायत थी कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित रूप से अवैध तरीके से दर्ज किया गया था, जबकि उन्होंने भारतीय नागरिकता 1983 में हासिल की थी। हालांकि नाम 1982 में हटा दिया गया था, लेकिन 1983 में उसे फिर से शामिल कर लिया गया। शिकायत में सवाल उठाया गया है कि 1980 की वोटर लिस्ट में उनका नाम कैसे शामिल किया गया और इस एंट्री के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। इसमें फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की संभावना का भी आरोप लगाया गया है।

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