ज्ञान, कौशल, उद्योग और पर्यटन बने झारखंड की नई पहचान : डी.बी. सुंदरा रामम

जमशेदपुर, 1 अगस्त। झारखंड को केवल खनिज संसाधनों वाले राज्य के रूप में नहीं, बल्कि ज्ञान, कौशल, उद्योग, नवाचार और पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है। राज्य की नई पहचान मानव संसाधन, मूल्य संवर्धन और आधुनिक उद्योगों के माध्यम से बनाई जानी चाहिए। यह बातें टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट कॉरपोरेट सर्विसेज डी.बी. सुंदर रामम ने शनिवार को बिष्टुपुर स्थित सिंहभूम चैंबर भवन में सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एससीसीआई) एवं फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (एफजेसीसीआई) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “झारखंड में अवसर एवं चुनौतियाँ : सिम्पोजियम-2026” को संबोधित करते हुए कहीं।
उन्होंने कहा कि देश के लगभग 40 प्रतिशत खनिज संसाधनों से समृद्ध झारखंड को अब ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था और कुशल मानव संसाधन के रूप में भी स्थापित करने का समय आ गया है। राज्य के युवाओं की प्रतिभा पूरे देश में अपनी पहचान बना रही है, ऐसे में झारखंड में ही रोजगार के अधिक अवसर सृजित कर पलायन रोकने और रिवर्स माइग्रेशन की दिशा में कार्य करने की जरूरत है।
डी.बी. सुंदरा रामम ने कहा कि झारखंड की औद्योगिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए उद्योगों के विविधीकरण पर ध्यान देना होगा। उन्होंने पर्यटन की अपार संभावनाओं का उल्लेख करते हुए पलामू टाइगर रिजर्व, बेतला राष्ट्रीय उद्यान, जलप्रपातों और प्राकृतिक स्थलों के साथ-साथ औद्योगिक पर्यटन को भी बढ़ावा देने की वकालत की। उन्होंने कहा कि आधुनिक इस्पात संयंत्रों और खनन परियोजनाओं का भ्रमण लोगों को उद्योगों की वास्तविक कार्यप्रणाली और पर्यावरण संरक्षण के लिए अपनाई जा रही तकनीकों से परिचित कराएगा।
उन्होंने बताया कि राज्य में करीब 99 हजार करोड़ रुपये के निवेश समझौते हुए हैं, जिनसे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की संभावना है। नई औद्योगिक नीति को और प्रभावी बनाने के लिए उद्योग जगत द्वारा सरकार को कई सुझाव दिए गए हैं।
ओडिशा के औद्योगिक विकास का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि बेहतर आधारभूत संरचना, लॉजिस्टिक्स और संपर्क व्यवस्था के माध्यम से झारखंड भी निवेश के लिए आकर्षक बन सकता है। उन्होंने निवेश परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति देने की आवश्यकता पर बल देते हुए जमशेदपुर के लिए दीर्घकालिक जरूरतों को ध्यान में रखकर आधुनिक हवाई अड्डे के निर्माण की दिशा में सरकार, उद्योग जगत, एफजेसीसीआई और एससीसीआई को मिलकर पहल करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि यदि उद्योग, पर्यटन, कौशल विकास और आधुनिक बुनियादी ढांचे पर समान रूप से ध्यान दिया जाए तो आने वाले वर्षों में झारखंड देश के अग्रणी औद्योगिक एवं ज्ञान आधारित राज्यों में अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकता है।

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