मालती धारी कॉलेज के विकास के लिए हर संभव प्रयास किया जायेगा – संजय सिंह टाइगर

 

नौबतपुर (पटना), 14 जुलाई। मालती धारी कॉलेज, नौबतपुर में मंगलवार को महाविद्यालय का 70 वाँ स्थापना दिवस हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया। समारोह के मुख्य अतिथि बिहार सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री संजय कुमार सिंह टाइगर थे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अखिलेश कुमार ने की।समारोह में पटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव (रजिस्ट्रार) प्रो. अबू बकर, तरेत पाली आश्रम के मुख्य महंथ स्वामी सुदर्शनाचार्य, राष्ट्रीय स्वय सेवक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष श्री मोहन सिंह, पूर्व प्राचार्य प्रो बंगाली सिंह के ज्येष्ठ पुत्र डॉ. राजीव कुमार सिंहा, राम कृष्ण द्वारका कालेज की प्राचार्या प्रो. सीता सिन्हा,कालेज के पूर्व प्राचार्य प्रो. कन्हैया प्रसाद सिंहा, रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डा जंग बहादुर पाण्डेय विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र देकर स्वागत किया गया।प्राचार्य डॉ. अखिलेश कुमार ने अपने स्वागत भाषण में महाविद्यालय की 70 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, शैक्षणिक उपलब्धियों तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप किए जा रहे नवाचारों पर गहन प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री श्री संजय कुमार सिंह ने कहा कि मालती धारी कॉलेज ने इस ग्रागीण क्षेत्र में उच्च शिक्षा के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने विद्यार्थियों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन एवं नवाचार के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में भागीदारी निभाने का आह्वान किया और कहा कि कालेज के चतुर्दिक विकास के लिए प्राचार्य द्वारा दी गई हर परियोजना पर विमर्श कर समुचित अनुदान दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि अर्थाभाव के बावजूद कालेज के कुशल प्राचार्य डा अखिलेश कुमार सिंह कालेज के चतुर्दिक विकास के लिए कृत संकल्पित हैं-यह प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने छायावादी कवि जय शंकर प्रसाद की प्रेरक पंक्तियों का उल्लेख करते हुए प्राचार्य का मनोबल बढाया-:-
*वह पथ क्या, पथिक कुशलता क्या?*
*जिस पथ पर बिखरे शूल न हों।*
*नाविक की धैर्य परीक्षा क्या,*
*जब धाराएं प्रतिकूल न हों।*
समारोह के दौरान महाविद्यालय की विभिन्न इकाइयों एवं गतिविधियों की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया गया। छात्र संसद के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. राजीव कुमार रंजन, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) की कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. कुमारी भारती, राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) की कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. श्वेता बाला तथा क्रीड़ा (स्पोर्ट्स) प्रभारी डॉ. गोरख राम के नेतृत्व में संचालित गतिविधियों की अतिथियों ने सराहना की और उन्हें सम्मानित भी किया गया।इस पावन अवसर पर कालेज के प्राचार्य डा अखिलेश कुमार के संपादकत्व में प्रकाशित स्मारिका तथा डॉ. कुमारी भारती द्वारा लिखित पुस्तक “विकसित भारत 2047 और भारतीय ज्ञान परंपरा का अंतर्संबंध” का मंचस्थ माननीय अतिथियों द्वारा लोकार्पण किया गया। अतिथियों ने पुस्तक को विकसित भारत की संकल्पना एवं भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित एक महत्वपूर्ण अकादमिक कृति बताया।
कालेज के पूर्व प्राचार्य प्रो बंगाली सिंह के ज्येष्ठ सुपुत्र तथा पी एम सी एच के अधीक्षक डा राजीव कुमार सिन्हा ने अपने बचपन की स्मृतियों को साझा किया और कहा कि पिता जी पूर्णिया कालेज की पक्की नौकरी छोडकर नौबतपुर प्राचार्य के रूप में 1956 में आये थे। नियुक्ति के बाद उन्होंने कालेज प्रबंधन से पूछा कि कालेज कहाँ है?कालेज के संस्थापक सचिव एवं वरीय अधिवक्ता श्री सिद्धेश्वरी प्रसाद सिंह ने कहा कि कालेज हैं कहां? कालेज तो आपको खडा करना है। पिताजी उस जमाने में इलाके में घूम घूम कर लोगों से आर्थिक अनुदान मांगा और 4000/ रूपये जो पूर्णिया से बचाकर आये थे, कालेज निर्माण में लगा दिया। इस तरह दो वर्षो के भीतर येन केन प्रकारेण कालेज विद्यालय से अपने भवन में आ खडा हुआ। उन्होंने कहा कि हमारे पास साइकिल नहीं थी। कालेज के चपरासी केदार की साइकिल पर हमने साइकिल चलाना सीखा। इस परिसर में हमारा बचपन बीता है-यह कहते हुए वे भावुक हो गये। उन्होंने अपने पिता श्री बंगाली बाबू की उदारता, सहृदयता और मानवीयता का भी उल्लेख किया।अवसर पर राष्ट्रीय स्वय सेवक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष मोहन सिंह ने राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों एवं छात्रों के योगदान का आहवान किया तो कुलसचिव प्रो. अबू बकर ने कालेज के विकास के लिए विश्वविद्यालय की ओर से हर सहायता एवं शैक्षणिक पाठ्यक्रमों के लागू करने में सहयोग का आश्वासन दिया। रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डा जे बी पाण्डेय ने कहा कि कालेज अपने स्थापना काल से ही ग्रामीण क्षेत्र में उच्च शिक्षा के प्रचार -प्रसार के लिए कृत संकल्पित है। कालेज के संप्रति प्राचार्य डा अखिलेश कुमार तन मन धन से इस कालेज को उत्कृष्ट गुणवत्ता पूर्ण केंद्र (Centre of excellence ) बनाना चाहते हैं। डा जे बी पाण्डेय ने प्राचार्य के मनोबल को बढाते हुए कहा कि :-
*तू बेहतर है तो बेहतरीन की तलाश कर,*
*मिल जाए नदी तो समंदर की तलाश कर।*
*टूट जाते हैं शीशे पत्थर की चोट से,*
*टूट जाए पत्थर तू ऐसे शीशे की तलाश कर।*
अन्य मंचस्थ अतिथियों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए महाविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना की तथा स्थापना दिवस की शुभकामनाएँ दीं।इस अवसर पर किसान कालेज सोहसराय के प्राचार्य डा दिव्यांशु कुमार, पूर्व कालेज निरीक्षिका डा हेम लता सिंह, परीक्षा संचालक डा मनोज कुमार, वाई बी एन विश्वविद्यालय रांची के समाज शास्त्र के प्रो डा मनोज गोवर्द्धनपुरी और वही के इतिहास विभाग के प्रो डा राजेंद्र प्रसाद सहित अनेक विद्वान विदुषियों की गरिमामयी उपस्थिति बनी रही।आगत अतिथियों का भव्य स्वागत प्राचार्य डा अखिलेश कुमार ने, कुशल मंच संचालन डॉ. श्वेता बाला ने, सरस्वती वंदना कालेज की छात्राओं ने, और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. विकास कुमार ने किया।
समारोह में महाविद्यालय के शिक्षकगण डॉ. राजीव कुमार रंजन, डॉ. गोरख राम, डॉ. संयुक्ता मयूरी, डॉ. ऋषिकेश, डॉ. कुमारी भारती, डॉ. अंकित एवं डॉ. अभय झा सहित अन्य शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी, छात्र-छात्राएँ तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समारोह को और अधिक आकर्षक एवं यादगार बना दिया।

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