रॉची नगर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का हुआ समापन, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
रॉची – श्री अग्रसेन भवन अपर बाजार में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के बीच विश्राम हो गया। समापन दिवस पर कथा व्यास आचार्य पं अश्विनी मिश्र ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की अमर मित्रता का भावपूर्ण प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। और उन्होंने सात दिवसीय कथा का संक्षिप्त व्याख्यान दिया सनातन धर्म, द्रौपदी के चीर हरण, छल कपट, ग्रहस्थ जीवन, बेटियों के स्नेह, न्याय व्यवस्था पर भी प्रकाश डाला।
कथावाचक ने कहा कि सच्ची मित्रता कभी धन, पद, प्रतिष्ठा या वैभव पर आधारित नहीं होती, बल्कि उसका वास्तविक आधार प्रेम, विश्वास, सम्मान और समर्पण होता है। उन्होंने श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता का उदाहरण देते हुए बताया कि विपरीत परिस्थितियों और गरीबी के बावजूद सुदामा ने कभी अपनी मित्रता का लाभ उठाने का प्रयास नहीं किया तथा अपने स्वाभिमान और मित्रता की गरिमा को बनाए रखा।
उन्होंने कहा कि द्वारकाधीश बनने के बाद भी भगवान श्रीकृष्ण अपने बाल सखा सुदामा को नहीं भूले। जब सुदामा द्वारका पहुंचे तो श्रीकृष्ण ने उन्हें गले लगाकर सम्मान दिया और पूरी दुनिया के सामने सच्ची मित्रता का आदर्श प्रस्तुत किया।
कथावाचक ने कहा कि सच्चा मित्र वही होता है जो सुख-दुख में साथ निभाए, विपरीत परिस्थितियों में भी मित्र का सम्मान बनाए रखे और कभी उसका साथ न छोड़े। उन्होंने कहा कि कृष्ण-सुदामा की मित्रता आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।इस दौरान सांवरिया है सेठ म्हारी राधा सेठानी है…… काली कमली वाला मेरा यार है मेरा मनमोहन मुरली वाला है….. जैसे भजनों पर श्रद्धालु भक्त के सागर में गोता लगाते रहे। इस दौरान राधे राधे से पुरा कार्यक्रम स्थल गुंजता रहा। आगे उन्होंने कहा कि लोगों में नफ़रत बढ़ रही है डाकघर प्रेम के कारण चलता था। और कचहरी नफरत कि बजह से चलती है। और वर्तमान में डाकघर कम हो रहें हैं और नफ़रत बढ़ने से प्रेम कम हो रहा है। सबसे अधिक पुण्य कमाने वाले मंत्री, चिकित्सक और शिक्षक ये सभी देश का निर्माण करते हैं। इनको अपने कर्म पूरे ईमानदारी से करने चाहिए तभी बिकास होगा। कार्यक्रम के समापन पर हवन पूजन किया गया। भागवत का मुलपाठ आचार्य बिष्णु शर्मा ने सहयोग देवनारायण शास्त्री,अमन शर्मा, संगीत की प्रस्तुति नेहाल शर्मा,अमन झा, प्रताप कुमार, लव कुश शर्मा ने दिया। कार्यक्रम में सुदामा कि भुमिका में कृत अग्रवाल, कृष्ण की भुमिका में पलक अग्रवाल, और रुक्मिणी कि भुमिका में रिद्धि मंगल ने निभाई।
कथा के समापन पर श्रद्धालुओं के बीच सुमन अरविन्द कुमार मंगल, मेद्या अर्पित मंगल द्वारा प्रसाद का वितरण किया गया। पूरे कथा स्थल पर भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा तथा श्रद्धालुओं ने धर्म लाभ प्राप्त किया।
इस अवसर पर पदमा देवी, रेणु मंगल,आशा मंगल,आशा देवी,सरिता देवी, अंजना देवी, रेखा देवी, पिस्ता अग्रवाल, सुशीला देवी,निर्मला गोयल, वीणा देवी,पिंकी अग्रवाल, पायल अग्रवाल, अनीता देवी, विनीता केजरीवाल, दीपाली भदानी, संजय अग्रवाल, सुशील अग्रवाल, शुभाष मंगल, अरविन्द चौधरी, विनोद अग्रवाल, केदारमल अग्रवाल, मुरारी लाल, दामोदर अग्रवाल, जगदीश अग्रवाल, पंडित रत्नेश मिश्रा और गोपाल मिश्रा, वैदिक अग्रवाल सहित
बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे। कथा के समापन के साथ ही राधे -राधे के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
