, जेडी वेंस बोले- “हमने बेस्ट ऑफर दिया, ईरान नहीं माना”, 10 बड़ी बातें
ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में हुई वार्ता में कोई समझौता नहीं हो पाया, जिससे जेडी वेंस ने निराशा जताईबातचीत का मुख्य फोकस मिडिल ईस्ट के हालात सुधारना, लेबनान में इजरायल के हमलों को रोकना और होर्मुज थालगभग 21 घंटे चली बातचीत में ईरान ने अमेरिकी शर्तें मानने से इनकार कर दिया और अमेरिका बिना समाधान लौट रहा है
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि इस्लामाबाद में हुई बातचीत के दौरान हम किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए हैं. ईरान हमारी कई शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं है. हम बिना किसी समझौते के अमेरिका वापस जा रहे हैं. ईरान और अमेरिका एक प्वाइंट पर नहीं पहुंच पाए हैं, जहां जंग का समाधान निकल सके. इस शांति वार्ता का सबसे बड़ा फोकस फिलहाल मिडिल ईस्ट के हालात सामान्य करना, लेबनान पर हो रहे इजरायल के हमलों को रोकना और होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना था, जिससे क्रूड ऑयल के आसमान छूती कीमतों पर लगाम लग सके.
ईरान ने शांति वार्ता विफल होने पर क्या कहा?
इस्लामाबाद में फेल हुई शांति वार्ता के बाद ईरान ने कहा, “अमेरिकी की ओर से बहुत ज्यादा डिमांड रखी गई थीं, जिन्हें हम किसी भी कीमत पर मानने को तैयार नहीं थे.”
ईरान ने हमारी शर्तें नहीं मानी- जेडी वेंस
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “अब तक हम किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं. हमारे बीच कई मुद्दों पर असहमति है. यह बुरी खरब है कि उन्होंने हमारी शर्तें नहीं मानी हैं.” जेडी वेंस ने कहा कि ईरान के साथ पहले दिन हमारी बातचीत अच्छी रही. हमने ईरान को बेस्ट ऑफर दिया था, लेकिन वो मानने को तैयार नहीं हैं. इसलिए हम किसी समाधान तक नहीं पहुंच पाए हैं. हम किसी हल निकले बिना अमेरिका वापस जा रहे हैं.
21 घंटे चली बातचीत फेल
अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को लगभग 21 घंटे बातचीत हुई. अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस वार्ता की अगुवाई की. वहीं, ईरान की तरफ से विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ बातचीत में शामिल हुए. पाकिस्तान की तरफ से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर बैठक में मौजूद रहे. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो ईरान और अमेरिका की बातचीत के फेल होने का कारण होर्मुज स्ट्रेट है. ईरान यहां पूरी तरह से अपना कब्जा चाहता है. लेकिन अमेरिका ने साफ कह दिया है कि ये इंटरनेशनल रास्ता है. ईरान और अमेरिका दोनों स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व जानते हैं.
