ट्रेजरी घोटाले के बाद जमशेदपुर प्रशासन अलर्ट,DC ने किया कोषागार का औचक निरीक्षण, DDO बिल की गहन जांच का निर्देश

 

 

जमशेदपुर:

झारखंड के हजारीबाग और बोकारो में उजागर हुए ट्रेजरी घोटाले के बाद जमशेदपुर प्रशासन अलर्ट मोड में है। राज्य के कई जिलों में वित्तीय अनियमितताओं की आशंका के बीच पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने शनिवार को जमशेदपुर मुख्यालय स्थित कोषागार का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान कोषागार से निकासी प्रक्रिया को पूरी तरह सख्त करने के निर्देश दिये हैं।

उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने किया औचक निरीक्षण
पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने कोषागार का औचक निरीक्षण कर वहां की कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोषागार जिला की वित्तीय व्यवस्था का केंद्र है, इसलिए यहां से होने वाली हर निकासी नियमों के अनुरूप और पूर्ण सत्यापन के बाद ही होनी चाहिए। निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने कोषागार पदाधिकारी को निर्देश दिया कि निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (DDO) द्वारा भेजे गये प्रत्येक बिल की बारीकी से जांच की जाये।

यह सुनिश्चित किया जाये कि सभी विपत्र कोषागार संहिता के प्रावधानों के अनुरूप हों और आवंटन में दिये गये दिशा-निर्देशों के अनुसार ही भुगतान किया जाये।

 

वेतन-मानदेय भुगतान में बरती जाएगी सतर्कता
ट्रेज़री घोटाले में फर्जी वेतन निकासी के मामलों को देखते हुए उपायुक्त ने वेतन और मानदेय भुगतान की प्रक्रिया को लेकर विशेष सतर्कता बरतने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि कर्मियों के नाम, पदनाम, जन्मतिथि सहित सभी विवरणों का मिलान ऑनलाइन रिकॉर्ड या सर्विस बुक से अनिवार्य रूप से किया जाये। साथ ही भुगतान से पूर्व यह भी सुनिश्चित किया जाये कि संबंधित कर्मी वास्तव में कार्यरत है। बैंक खाते का सत्यापन पासबुक या चेक के आधार पर करने और पे-स्लिप/लेखा सत्यापन के आधार पर ही वेतन निर्गत करने के निर्देश दिये गये।

बच गई राशि का नियमानुसार सरेंडर हो
इस दौरान उपायुक्त ने कोषागार में बुक ट्रांसफर, सब-अलॉटमेंट, फ्रेश अलॉटमेंट और अनयूज्ड अलॉटमेंट की जानकारी भी ली। उन्होंने जिले में संचालित पीएल अकाउंट और पीएल सबहेड का पूरा ब्योरा भी मांगा। साथ ही निर्देश दिया कि जो राशि खर्च नहीं हो पायेगी, उसे संबंधित विभागों से समन्वय कर समय पर सरेंडर कराया जाये।

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