अजय अग्रवाल नामक बिल्डर ने जमशेदपुर और सरायकेला खरसावां के अनगिनत व्यक्तियों से जालसाजी करते हुए गलत जमीन कागजात दिखाकर फ्लैट बुक किया और धोखा देकर लगभग 40 करोड़ रु बटोर कर फरार हो गया। वह पता बदल बदल कर कभी वापी, गुजरात तो कभी हैदराबाद तो कभी इंफाल भागे चला। अंततः साकची पुलिस ने काफी पीछा करते हुए उसको रांची के एक होटल से गिरफ्तार कर जमशेदपुर न्यायालय मे प्रस्तुत किया जहां से उसको साकची जेल भेजा गया है। यहां निचली अदालत में इसकी जमानत अर्जी अस्वीकृत हुई है। आश्चर्य है साकची जेल में उसे जेल मैनुअल का उल्लंघन करते हुए किसी सुविधाभोगी कैदी की तरह सुविधाएं दी जा रही है। साकची बाजार के एक होटल का दरवाजा उसके लिए ही नहीं ,अपितु जेल परिसर के अन्य लोगों के लिए सुबह शाम भोजन हेतु खोल दिया गया है। अजय अग्रवाल के एक बड़े भाई, ड्राइवर एवं उसके कुछ स्टाफ साकची जेल गेट पर उनकी सेवा में तैनात रहते हैं। एम जी एम अस्पताल में भर्ती होने के लिए अजय अग्रवाल की लगातार कोशिश हो रही है लेकिन वहां वह फॉर फिट ही पाया जा रहा। उसपर शहर के एक बड़े आपराधिक गिरोह की भी नजर है। जेल में जिस ढंग से उसे खुली छूट मिली है और स्वास्थ्य जांच के लिए अस्पताल भेजने की कोशिश हो रही है तो कोई बड़ी अनहोनी न हो जाए इससे इंकार नहीं किया जा सकता। उसको मिल रही सुविधाएं उन लोगों के दिल पर गहरी चोट देती है जिनकी मेहनत की कमाई अजय अग्रवाल ने ऐंठ ली और आशियाना की आस में अब वे उसके हाथ पैसे गंवा कर उन्हीं पैसों की बदौलत मौज करते देख रहे हैं। अजय अग्रवाल के विरुद्ध साकची थाना में जालसाजी और ठगी के दो अलग मामले, आदित्यपुर में मुकदमा, सरायकेला में शिकायतवाद आदि पहले से दर्ज है। ग्रीन वाटिका हाउसिंग प्रोजेक्ट के नाम से आदित्यपुर, एन आई टी, गंमहरिया, आदि में उसने अपार्टमेंट बनाने का सब्ज बाग दिखा कर यह ठगी की है।
