ईपीएस-1995 के तहत मात्र 1000 रु न्यूनतम पेंशन अपर्याप्त, संसदीय समिति की बड़ी सिफारिश

श्रमिकों के लिए खुशखबरी, पेंशन और सैलरी बढ़ाने की तैयारी,15वीं रिपोर्ट पेश

 

 

श्रमिकों के लिए बड़ी खबर है। यूं कहें तो खुशखबरी है। दरअसल, श्रम, वस्त्र और कौशल विकास संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने न्यूनतम पेंशन में वृद्धि, गिग वर्कर्स के लिए ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य करने तथा श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा मजबूत करने की अहम सिफारिशें की हैं। समिति के अध्यक्ष बसवराज बोम्मई ने लोकसभा में ‘अनुदान की मांग (2026-27)’ पर 15वीं रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान में ईपीएस-1995 के तहत न्यूनतम पेंशन मात्र 1000 रुपये मासिक है, जो अपर्याप्त है। समिति ने इसकी तत्काल समीक्षा और वृद्धि की मांग की है, ताकि बढ़ती जीवनयापन लागत और मुद्रास्फीति के बीच पेंशनभोगियों को राहत मिल सके।

समिति ने राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि की पुरजोर वकालत की है। इसके साथ ही कमजोर श्रमिकों की वास्तविक मजदूरी की सुरक्षा के लिए स्वचालित आवधिक संशोधन व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की गई है। संविदा श्रमिकों को दुर्घटना के बाद राहत में देरी की समस्या को देखते हुए समिति ने ईएसआई और भविष्य निधि (PF) योजनाओं के तहत समयबद्ध कवरेज सुनिश्चित करने पर जोर दिया। केंद्र और राज्य सरकारों से सख्त अनुपालन निगरानी की अपील की गई है।

बाल श्रम उन्मूलन के लिए समिति ने राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना (NCLP) को सर्व शिक्षा अभियान में विलय पर पुनर्विचार करने तथा एक समर्पित संस्थागत ढांचे की स्थापना की सिफारिश की है। आधुनिक अर्थव्यवस्था में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए समिति ने ई-श्रम पोर्टल पर इनके पंजीकरण को अनिवार्य बनाने की सिफारिश की है। साथ ही एग्रीगेटर्स की जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने का आग्रह किया गया है, ताकि इन श्रमिकों को आवश्यक बीमा, दुर्घटना कवरेज और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ मिल सकें।

रोजगार सृजन के लिए प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) की वास्तविक समय निगरानी पर जोर देते हुए समिति ने कहा कि योजना को जुलाई 2027 तक 3.5 करोड़ नौकरियां पैदा करने के लक्ष्य को पूरा करना चाहिए। नए श्रम संहिताओं के कार्यान्वयन के लिए समिति ने खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) में रिक्त पदों को शीघ्र भरने, आधुनिक निगरानी प्रौद्योगिकियों को अपनाने तथा केंद्र-राज्यों के बीच स्थायी समन्वय बोर्ड गठित करने की सिफारिश की है।

इतना ही नहीं, समिति ने जोर दिया कि चार श्रम संहिताओं के नए नियामक ढांचे से अधिक न्यायसंगत, सुरक्षित और अनुशासित श्रम बाजार का निर्माण होगा, जिससे श्रमिकों के अधिकारों की बेहतर रक्षा संभव होगी।

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