ग्रिड फ्लेक्सिबिलिटी, एनर्जी स्टोरेज, डिजिटल एनर्जी सिस्टम, एआई और इंडस्ट्रियल डीकार्बोनाइजेशन में शोध व ज्ञान के आदान-प्रदान पर मिलकर काम करेंगे दोनों संस्थान
जमशेदपुर, 13 अक्टूबर, भारत की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड पावर कंपनियों में से एक, टाटा पावर और यूके की विश्व स्तर पर अग्रणी यूनिवर्सिटी, इंपीरियल कॉलेज लंदन ने एक ऐतिहासिक समझौता किया है। इस साझेदारी का उद्देश्य ऊर्जा संक्रमण के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मिलकर रिसर्च करना, नई टेक्नोलॉजी विकसित करना और एक-दूसरे के साथ ज्ञान साझा करना है।
यह सहयोग मुख्य रूप से ग्रिड फ्लेक्सिबिलिटी, एनर्जी स्टोरेज, ऊर्जा के क्षेत्र में एआई और मशीन लर्निंग के इस्तेमाल और एडवांस्ड एनर्जी सिस्टम्स पर केंद्रित होगा। इसके तहत, बड़े पैमाने पर पावर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने और उसे चलाने के टाटा पावर के जमीनी अनुभव का लाभ मिलेगा, जिसे डिजिटल टेक्नोलॉजी और डीकार्बोनाइजेशन के क्षेत्र में इंपीरियल कॉलेज की ग्लोबल रिसर्च विशेषज्ञता के साथ जोड़ा जाएगा।
यह रणनीतिक साझेदारी ऐसे समय में हुई है जब भारत और यूके स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु सुरक्षा पर अपने संबंधों को मजबूत कर रहे हैं। ‘भारत-यूके विजन 2035’ के तहत, दोनों देशों ने एआई, रिन्यूएबल्स, एनर्जी स्टोरेज, हाइड्रोजन और कार्बन कैप्चर पर मिलकर काम करने का फैसला किया है, जिसमें ग्रिड ट्रांसफॉर्मेशन को प्राथमिकता दी गई है। यह विजन जलवायु नवाचार के लिए तकनीकी समाधानों को बढ़ावा देने और नए वैश्विक मार्केट तैयार करने के लिए ‘नेट जीरो इनोवेशन पार्टनरशिप’ को एक बड़े माध्यम के रूप में देखता है।
साझेदारी पर टिप्पणी करते हुए, यूके सरकार के बिजनेस और ट्रेड सेक्रेटरी जोनाथन रेनॉल्ड्स ने कहा: “जब ब्रिटेन की बेहतरीन रिसर्च टीम भारत के कॉरपोरेट जगत की महत्वाकांक्षा और विशेषज्ञता के साथ हाथ मिलाती है, तो जमीनी स्तर पर एक बड़ा बदलाव लाने की अपार संभावनाएं पैदा होती हैं। यह साझेदारी हमारे शानदार नए व्यापार समझौते के जरिए सामने आ रहे जमीनी अवसरों का एक बेहतरीन उदाहरण है। यह सहयोग आइडियाज को अधिक स्वच्छ और स्मार्ट ऊर्जा समाधानों में बदलने में मदद करेगा, जिससे दोनों देशों में अच्छे रोजगार और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।”
दक्षिण एशिया के लिए महामहिम के ट्रेड कमिश्नर और पश्चिमी भारत के लिए ब्रिटिश डिप्टी हाई कमिश्नर हरजिंदर कांग ने कहा: “इंपीरियल कॉलेज लंदन और टाटा पावर के बीच यह साझेदारी ब्रिटेन और भारत द्वारा नवाचार को जमीनी प्रभाव में बदलने के लिए अपनी ताकतों को एकजुट करने का एक शानदार उदाहरण है। ब्रिटेन की विश्व स्तरीय रिसर्च और भारत की औद्योगिक विशेषज्ञता को एक साथ लाने से अगली पीढ़ी के ऊर्जा समाधानों को गति मिलेगी, नए व्यावसायिक अवसर खुलेंगे और दोनों देशों में टिकाऊ विकास को बढ़ावा मिलेगा।”
टाटा पावर के सीईओ और एमडी डॉ. प्रवीर सिन्हा ने कहा: “भारत का ऊर्जा संक्रमण अब एक ऐसे चरण में प्रवेश कर रहा है जहाँ नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ने की रफ्तार के साथ-साथ इसका पैमाना, लचीलापन और विश्वसनीयता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी। तेजी से बदलती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अगली पीढ़ी के ग्रिड, स्टोरेज और डिजिटल ऊर्जा प्रणालियों को मिलकर काम करना होगा। इंपीरियल कॉलेज के साथ हमारा यह सहयोग गहरी रिसर्च और नई सोच के जरिए उद्योग जगत की वास्तविक चुनौतियों का समाधान करने में मदद करेगा। इसके साथ ही हम ऐसे समाधान तलाशेंगे जो न केवल भारत की ऊर्जा यात्रा के लिए बल्कि व्यापक वैश्विक बदलाव के लिए भी प्रासंगिक हो सकें।”
यह साझेदारी शोध और नवाचार को व्यावहारिक रूप से जमीन पर उतारने के साझा दृष्टिकोण को दर्शाती है। टाटा पावर के पास बिजली उत्पादन, पारेषण, वितरण और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र का व्यापक अनुभव है, जबकि इंपीरियल कॉलेज एनर्जी सिस्टम, इंजीनियरिंग, डिजिटल टेक्नोलॉजी, इकोनॉमिक्स और डीकार्बोनाइजेशन जैसे क्षेत्रों में अपनी बेहतरीन रिसर्च क्षमता का योगदान दे रहा है।
इंपीरियल कॉलेज लंदन की वाइस प्रोवोस्ट (रिसर्च एंड एंटरप्राइज) प्रोफेसर मैरी रयान ने कहा: “दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनियों में से एक होने के नाते, टाटा पावर के पास ऊर्जा से जुड़ी विभिन्न तकनीकों की गहरी समझ है। साथ ही, उसके पास उन स्वच्छ और अधिक मजबूत ऊर्जा प्रणालियों को स्थापित करने का पैमाना भी है, जिनकी हमें आज बेहद जरूरत है। यह बात टाटा पावर को इंपीरियल के लिए एक बेहतरीन पार्टनर बनाती है। इंपीरियल न केवल विज्ञान, इंजीनियरिंग और बिजनेस में विश्व स्तरीय अत्याधुनिक रिसर्च क्षमताएं रखता है, बल्कि हमारे पास कंवर्जेंस साइंस का एक ऐसा मॉडल भी है जो लीक से हटकर सोचता है ताकि उन बड़ी चुनौतियों से निपटा जा सके जिन्हें नवाचार के सामान्य तरीकों से हल नहीं किया जा सकता।”
इन क्षमताओं को एक साथ लाकर, इस साझेदारी का उद्देश्य ऐसे समाधानों को विकसित करना और प्रदर्शित करना है जो अधिक लचीली, मजबूत और कम कार्बन वाली ऊर्जा प्रणालियों के निर्माण में योगदान दे सकें। इसके साथ ही, यह सहयोग भारत और यूके के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान और नवाचार के नए रास्ते भी खोलेगा।
