*सांसद से तनातनी –13* *डॉ मोहन भागवत का नाम दिन – रात जपना, पराया माल अपना*

जमशेदपुर । 8 सितंबर आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र फेज संख्या -3 में बी 50 पी एवं बी 51 पी ,(पी) नंबर वाले 30 हजार वर्गफुट औद्योगिक प्लाट की कसौटी पर औद्योगिक क्षेत्र में उद्योगों के हित में मुखियागिरी करने अथवा पंचायत लगाने वाले सभी पंच -एसिया, ल.उ.भा, इसरो,स्थानीय विधायक और एक सांसद फेल हैं। विदित हो कि 20 वर्ष पहले यह प्लाट आयडा (अब जियाडा) ने एक महिला उद्यमी को आवंटित किया, लेकिन महिला को एक सफेदपोश माफिया ने उस प्लाट पर आज तक दखल नहीं होने दिया, अलबत्ता उसके इर्द गिर्द अपना प्लांटेशन करवा दिया। सफेदपोश माफिया की नजर उस भूखंड पर है जहां बगल में ही उसका प्लांट है। कभी सांसद तो कभी विधायक के प्रभाव का इस्तेमाल कर स्थल पर इतनी भीड़ जमा कर विरोध करा देता है कि प्रशासन औपचारिकता कर लौट आता है।
इस औद्योगिक प्लॉट पर दखल नहीं होने देने की रची गयी साजिश के संदर्भ में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघ चालक डा मोहन भागवत का एक वक्तव्य अत्यंत सामयिक और उल्लेखनीय हो जाता है जिसमें वे अपने लोगों को यह बता रहे हैं कि पंचों की क्या भूमिका होती है। एक सम्मेलन में डा भागवत पंचों की व्याख्या करते हुए बताते हैं कि पंच क्या हैं-“*गांव के झगड़ों को मिटाना , अनुशासन बनाना , इनको देखना उनका दायित्व है। सर्वसम्मति से ये पांच पंच गांव का प्रतिनिधित्व करते हैँ। इन पांचों का शील और आचरण ऐसा रहता था कि लउनकी नजर की शर्म सारे गांव को रहती थी। उनके कहने के परे जाए ऐसा दुस्साहस कोई नहीं करता था,क्योंकि उनको पता रहता था कि वे भले लोग हैं। उनका कोई स्वार्थ नहीं है। ये जो बताएंगे यह हमारे हित की बात है, इनके विरुद्ध जाना हमारे नाश की बात है।*”
आश्चर्य की बात है कि आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में उद्योगों के हित के लिए लंबी लंबी बातें करने वाला एसिया हो या लघु उद्योग भारती या इसरो हो अथवा स्थानीय विधायक या प्रश्नगत सांसद सब आर एस एस और डॉ भागवत को मानने वाले और उनका नाम जाप करने वाले हैं। लघु उद्योग भारती (लउभा) के एक केंद्रीय सचिव तो इसी क्षेत्र से आते हैं और स्थानीय लउभा के नियंता भी हैं। इसी तरह वे एसिया के भी नियंता हैं। इतना ही नहीं वे सरसंघ चालक के अधीन झारखंड में एक विभाग प्रमुख भी हैं। पुलिस -प्रशासन के नवागंतुक अधिकारियों के स्वागत में सर्वदा आगे रहकर फोटो भी खिंचवाते हैं, लेकिन इनके शील और आचरण का अंतर ऐसा है कि एक महिला उद्यमी को न्याय दिलाने के बजाय उसे प्लॉट पर जाने से धमकाते हैं। सारी कहानी इसी शील और आचरण में छिपी हुई है। न्यू इस्पात मेल में लगातार छप रहे सीरिज से स्पष्ट हो गया है कि सफेदपोश उद्योग – स्क्रैप माफिया कौन है और उसकी जड़ें संघ से लेकर शासन में कहां तक- कैसे- किसके बल पर फैल गई हैं और किन- किन संगठनों पर उसने कब्जा कर सबको जेबी बना रखा है। इसरो के अलावे वह माफिया उक्त सभी संगठनों और संघ के लोगों , सांसद, विधायक को अपनी जेब में रखने का दंभ भरता है। यह बात महत्वपूर्ण है कि फिलहाल सांसद से तनातनी के कारण सफेदपोश के कारनामे लोग बताने की हिम्मत जुटाने लगे हैं। फिर भी महिला उद्यमी के लिये इनमें से कोई आवाज नहीं उठा रहा। संघ से जुड़े एक मात्र संत व्यक्ति ने पीड़ित महिला को उनका अधिकार दिलाने में राष्ट्रवादी संगठनों को आगे आने का आह्वान किया है। विदित हो उस महिला को लगातार डराया- धमकाया गया है। लेकिन उनकी हिम्मत की दाद देनी चाहिए कि वह अभी तक डटी हुई हैं और अब उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया है। इस प्लॉट पर नाजायज कब्जा के बाद अगले अंक में पढ़िए …. मल्टी कास्ट का क्या है मामला… (जारी)

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