बड़ी यह भी सच्चाई : टाटा मोटर्स में ग्रेड रिवीजन पर रोड शो, टाटा स्टील में ग्रेड रिवीजन पर नेताजी को एक फूल भी नहीं
जमशेदपुर। टाटा स्टील में ग्रेड रिवीजन हो गया है। ग्रेड रिवीजन अच्छा हुआ हो या खराब हुआ हो , कर्मचारियों के लिए जो होना था वह हो गया है। अब कर्मचारियों के पास जोड़ – घटाव करने के अलावा और कुछ नहीं बचा है। भले ही वे हाय तौबा कर लें डिप्रेशन में आ जाए , लेकिन समझौते के तहत ही उन्हें उनकी राशि आने वाले दिनों में मिलेगी। वेतन में बढ़ोतरी समझौते के ही आधार पर होगी। लेकिन इस बीच टाटा वर्कर्स यूनियन के पदाधिकारी से लेकर कमेटी सदस्यों के बीच भूचाल मचा हुआ है। वे अपने-अपने सोशल मीडिया या ग्रुप में तरह-तरह की बातें लिखने में जुट गए हैं।
इस बीच यह बात सामने आई है कि अब सच पर दहशत का पर्दा पड़ गया है। ऐसे में यूनियन के नेता हो या कमेटी सदस्य हो या फिर कर्मचारी कोई कुछ भी ग्रुप में लिखने से कतराने लगे हैं। पिछले दिनों यूनियन के चार कमेटी सदस्यों को प्रबंधन के सामने जाकर परेड करना पडा हैं। वही अब यूनियन के कुछ पदाधिकारी को भी शुक्रवार की शाम जाकर परेड लगाना पड़ गया है। चर्चा है कि उन्हें सख्त हिदायत भी दे दी गई है कि वह मर्यादा में रहकर यूनियन की राजनीति करें। ऐसा कोई भी काम नहीं करें जिससे ऐतिहासिक संस्था की छवि धूमिल हो। वही शुक्रवार की शाम तक टाटा वर्कर्स यूनियन के ग्रुप के कमेटी सदस्यों के बीच ग्रेड रिवीजन को लेकर, यूनियन नेताओं को कोसने से लेकर तरह-तरह की बातें लिखी जा रही थी। सूत्र बताते हैं कि अब कमेटी सदस्य भी कुछ भी सच या सच से परे लिखने से कतराने लगे हैं। चर्चा यह भी है कि सभी कमेटी सदस्यों को उनके अपने-अपने अलाकमान ने अलर्ट कर दिया है कि कुछ भी ऐसा ना करें जिससे आने वाले समय में कोई परेशानी खड़ी हो। बताया जाता है कि इसके लिए अलाकमान के पास भी एक तगड़ा फरमान जारी हो गया है इसके बाद उन्होंने अपने-अपने चहेतों को अलर्ट करना शुरू कर दिया है।
जिस तरह से ग्रेड रिवीजन के बाद ग्रुप में चर्चाएं चल रही हैं उसमें कहीं कोई दो मत नहीं है कि जब टाटा मोटर्स में ग्रेड रिवीजन हुआ तो कर्मचारियों ने खुशी में यूनियन नेतृत्व का कंपनी परिसर से लेकर यूनियन ऑफिस तक रोड शो निकला। पूरे रोड पर ढोल नगाड़े , डीजे की धुन के बीच आतिशबाजी की। फूल मालाओं से नेताओं को ऐसे भर दिया था जैसे मानो कोई सांसद या विधायक क्षेत्र में चुनकर आए हैं। उसके बाद टाटा स्टील टिनप्लेट डिवीजन में ग्रेड रिवीजन हुआ जिसमे भी कंपनी के कर्मचारियों ने या कमेटी सदस्यों ने अपने नेताओं का जहां तक हुआ स्वागत किया। कुछ विभागों में अभी भी स्वागत का सिलसिला चल रहा है।
विडंबना है कि जब टाटा स्टील में ग्रेड रिवीजन हुआ तो यूनियन के पदाधिकारियों को कोई कमेटी सदस्य या कर्मचारी एक फूल भी देकर स्वागत करने में कतराते रहे। अब इसके पीछे बड़ी वजह क्या है यह तो कर्मचारी ही बता पाएंगे, या यूनियन के पदाधिकारी ही बता पाएंगे कि कमेटी सदस्यों या कर्मचारी में ऐसी नाराजगी क्यों। शायद यह ग्रेड रिवीजन में एक तरह से ऐतिहासिक मौका देखने को मिला जब न ढोल बाजे, न नगाड़े, बजे ना आतिशबाजी हुई ना ही लड्डू बाते लेकिन जिस कर्मचारी से मीडिया की बात होती है वह यही कहते हैं कि इस बार उन्हें ग्रेड रिवीजन में मात खानी पड़ी है। सभी कहीं ना कहीं अपने नुकसान की ही बात कर रहे हैं।
