शिवानंद तिवारी ने लिखा भावुक पोस्ट…..अंतिम यात्रा……..मेरा दाह संस्कार ….जमशेदपुर में हो….

 

पटना। बिहार की राजनीति के वरिष्ठ समाजवादी नेता ने अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर एक बेहद भावुक पोस्ट साझा की है। 83 वर्षीय शिवानंद तिवारी ने उम्र, स्वास्थ्य, परिवार और जीवन की अंतिम इच्छाओं को लेकर खुलकर अपने मन की बात लिखी है। उन्होंने यहां तक कहा है कि जब उनका अंतिम समय आए तो उनका दाह-संस्कार जमशेदपुर में ही किया जाए।

9 दिसंबर 1943 को जन्मे शिवानंद तिवारी ने अपने संस्मरण में लिखा कि जैसे गांव में तेल खत्म होने पर लालटेन की लौ टिमटिमाने लगती है, वैसे ही उन्हें अब अपना जीवन महसूस होता है। उन्होंने स्वीकार किया कि बढ़ती उम्र के साथ जीवन के अंतिम पड़ाव का एहसास स्वाभाविक है।

इन दिनों शिवानंद तिवारी जमशेदपुर में अपने बड़े बेटे और बहू के साथ रह रहे हैं। उन्होंने लिखा कि परिवार का भरपूर स्नेह और देखभाल मिल रही है, लेकिन शरीर की स्थिति यह संकेत दे रही है कि जीवन की यात्रा अब अपने अंतिम चरण में पहुंच रही है। हाल के दिनों में उन्हें दो बार अस्पताल में भर्ती भी होना पड़ा।

उन्होंने बताया कि छोटे बेटे ने बेहतर इलाज के लिए अपने पास बुलाने की इच्छा जताई, लेकिन उनका मानना है कि चिकित्सा जीवन को अनंत नहीं बना सकती। इंसान केवल इतना चाहता है कि उसका अंत कष्टदायक न हो।

अपने पोस्ट में उन्होंने पटना और जमशेदपुर के जीवन की तुलना भी की है। उनका कहना है कि पटना का वर्तमान आवास उन्हें एक तरह की कैद जैसा महसूस होता है, जबकि जमशेदपुर में घर की खिड़की से दिखने वाली खरकई नदी, हरियाली और शहर की हलचल उन्हें जीवन के करीब होने का एहसास कराती है।

शिवानंद तिवारी ने समाज में बदलते पारिवारिक मूल्यों पर भी चिंता जताई। उन्होंने लिखा कि आधुनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच बुजुर्गों के लिए समय और आत्मीयता दोनों कम होते जा रहे हैं।

वरिष्ठ नेता ने अपनी एक अधूरी इच्छा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जनवरी में होने वाली अपनी बड़ी पोती की शादी देखने की तमन्ना अभी भी उनके मन में है। इसके अलावा अब जीवन से उनकी कोई विशेष अपेक्षा नहीं बची है।

राजनीतिक जीवन को लेकर उन्होंने साफ कहा कि वे अपनी आत्मकथा नहीं लिखना चाहते। उनका मानना है कि जो कुछ सार्वजनिक जीवन में हुआ, वह लोगों के सामने है और अब किसी की प्रशंसा या आलोचना करने का कोई औचित्य नहीं है।

पोस्ट के सबसे भावुक हिस्से में शिवानंद तिवारी ने अपने परिवार के जमशेदपुर से जुड़े ऐतिहासिक संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उनके पिता ने जमशेदपुर में अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में हिस्सा लिया था और बाद में जेल भी गए थे। इसी भावनात्मक जुड़ाव के कारण उनकी इच्छा है कि अंतिम समय आने पर उनका दाह-संस्कार भी जमशेदपुर के विद्युत शवदाह गृह में किया जाए।

वरिष्ठ समाजवादी नेता की इस भावुक पोस्ट ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा छेड़ दी है। उनके शब्दों में जीवन का अनुभव, उम्र की सच्चाई और परिवार के प्रति गहरा लगाव साफ झलकता है।

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