नई दिल्ली:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई केंद्रीय मंत्रिपरिषद की मैराथन बैठक में सभी मंत्रियों को अपने प्रदर्शन का अंदाज़ा हो गया. कैबिनेट सचिव टी वी सोमनाथन ने एक विस्तृत प्रजेंटेशन दिया, जिसमें पिछले साल सभी मंत्रालयों के प्रदर्शन और कामकाज का आकलन किया गया. इस रिपोर्ट के अनुसार शिकायत निपटाने और फाइलों के निपटारे को प्रदर्शन का मुख्य आधार बनाया गया. साथ ही सभी क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा शेयरिंग, डेटा आधारित निर्णय, मॉनिटरिंग और इंटर-डिपार्टमेंटल समन्वय के पैमाने पर भी प्रदर्शन आंका गया. अदालतों में लंबित मामलों और उन्हें लेकर मंत्रालयों के रुख पर भी चर्चा हुई.
इसी के हिसाब से सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले मंत्रालयों का उल्लेख भी किया गया. सूत्रों के अनुसार इन पैमानों पर उपभोक्ता मामले, कोयला, ऊर्जा और स्वास्थ्य मंत्रालयों का प्रदर्शन संतोषजनक पाया गया. मंत्रिपरिषद में संभावित फेरबदल की अटकलों के बीच यह रिपोर्ट कार्ड काफी अहम माना जा रहा है. सूत्रों के अनुसार इसमें यह भी बताया गया कि अदालतों में मंत्रालयों से संबंधित मामले लंबे नहीं खिंचने चाहिए.
प्रक्रियाओं का सरलीकरण हो- कृषि मंत्री का अधिकारियों को निर्देश
इसके बाद कई मंत्री तुरंत हरकत में आ गए. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया जाए और पुराने-अप्रासंगिक रेगुलेशंस को खत्म किया जाए. चौहान ने अधिकारियों से पूछा कि हर चीज के लिए लाइसेंस की जरूरत क्यों हो, कई जगह पंजीकरण या आसान प्रणाली से काम क्यों नहीं हो सकता. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर विभिन्न योजनाओं में बाधा पैदा करने वाले प्रावधानों, जटिल प्रक्रियाओं और सुधार योग्य बिंदुओं की पहचान कर ली जाए, ताकि आगे त्वरित निर्णय लिया जा सके.
फाइलों के लटकने और भटकने को लेकर भी सक्रियता दिख रही है. मंत्रिपरिषद की बैठक में मंत्रालयों को कहा गया था कि फाइल जल्दी से चले, फालतू में चक्कर नहीं काटें. कम समय में ज्यादा काम करने और हर चीज में सरलता लाने का निर्देश भी पीएम की ओर से दिया गया था.
पुराना माइंडसेट प्रक्रिया को उलझा देता है- शिवराज सिंह
इसके बाद कृषि मंत्री ने अधिकारियों के साथ बैठक में प्रशासनिक कार्य संस्कृति में बदलाव पर भी खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि फाइल नीचे से बनकर ऊपर आती है और कई बार नीचे का पुराना माइंडसेट ही पूरी प्रक्रिया को उलझा देता है. इसलिए केवल ऊपर के स्तर पर नहीं, बल्कि नीचे से फाइल निर्माण, नोटिंग, निर्णय-तैयारी और ड्राफ्टिंग की गुणवत्ता सुधारने की जरूरत है. उन्होंने ड्राफ्टिंग को अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बताते हुए कहा कि विभागों में ऐसे अधिकारी विकसित किए जाएं, जो फाइलें और नोट्स मजबूत, स्पष्ट और नीति-संगत तरीके से तैयार कर सकें. इसके लिए प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और दक्षता वृद्धि की व्यवस्था की जाए, ताकि फाइलें अनावश्यक रूप से न अटकें और निर्णय की गुणवत्ता भी बेहतर हो.
न्यायालयों में लंबित मामलों को लेकर भी मंत्रिपरिषद की बैठक में चर्चा हुई थी. कई मामलों में सरकार इसलिए कमजोर पड़ जाती है, क्योंकि सरकारी पक्ष समय पर और प्रभावी ढंग से अदालत में रखा ही नहीं जाता. सभी विभागों से कहा गया है कि वे लंबित कोर्ट केसों की सूची निकालें, उनकी समीक्षा करें, नोडल अधिकारी तय करें, विधिक तैयारी मजबूत करें और जरूरत पड़े तो बेहतर वकीलों की व्यवस्था करें, क्योंकि सरकार की हार का सीधा नुकसान सार्वजनिक हित को होता है.
पीएम मोदी ने यह भी कहा था कि विकास कार्यों में बाधाओं की पहचान की जाए और समाधान निकाला जाए. अब हर डिवीजन को यह बताने को कहा गया है कि काम किस वजह से अटकता है, कौन सी बाधाएं फैसलों, क्रियान्वयन और लाभ वितरण में देरी करती हैं, और उन्हें दूर करने के लिए क्या सुधार किए जा सकते हैं. पीएम मोदी के निर्देश के बाद अब रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के साथ-साथ इन्फॉर्म करने की क़वायद भी साथ चलाने का फैसला किया गया है.
अब तक जो सुधार पहले ही किए जा चुके हैं, उनका “रिफॉर्म उत्सव” की तरह प्रचार-प्रसार किया जाएगा. कृषि मंत्री के अनुसार केवल सुधार कर देना काफी नहीं है, बल्कि जिनके लिए सुधार किए गए हैं, उन्हें बुलाकर संवाद किया जाना चाहिए, बताया जाना चाहिए कि क्या बदला है, उससे क्या लाभ होगा और आगे क्या और किया जा सकता है.
पीएम मोदी ने वैकल्पिक ऊर्जा के स्तोत्रों पर काम करने का भी निर्देश दिया था. उन्होंने बायो गैस के प्रयोग की बात भी कही थी. इसके बाद अब सरकारी भवनों और संस्थानों में पीएम सूर्य घर जैसी पहलों के अनुरूप सोलराइजेशन को भी आगे बढ़ाने की बात की जा रही है.
मोदी सरकार के मौजूदा कार्यकाल के दो वर्ष और अब तक पूरे 12 वर्षों की उपलब्धियों के प्रभावी प्रस्तुतीकरण के लिए भी कहा गया है. सभी मंत्रालयों को इसमें जुटने को कहा गया है.
विदेश यात्राओं पर निर्देश
पीएम मोदी ने मंत्रिपरिषद की बैठक में ईंधन बचत पर भी जोर दिया. उन्होंने अनावश्यक विदेश यात्राओं में कटौती करने को कहा था. अब मंत्रियों ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि केवल अत्यंत जरूरी मामलों में ही विदेश यात्रा के प्रस्ताव आगे आने चाहिए.
