भारत पर क्यों भरोसा करें? नार्वे की पत्रकार ने मानवाधिकारों पर पूछा सवाल, विदेश मंत्रालय ने वहीं पढ़ा दिया लोकतंत्र का पाठ


नॉर्वे में भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में नॉर्वे की एक पत्रकार हेला लेंग ने ड्रामा क्रिएट करने की कोशिश की. इस दौरान भारत के वरिष्ठ राजयनिक सिबी जॉर्ज की इस पत्रकार के साथ तीखी नोकझोंक हुई. इस दौरान विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने इस पत्रकार को लोकतंत्र, मानवाधिकार, प्रेस की आजादी पर अच्छी सीख दी.

इससे पहले पत्रकार ने हेला लेंग ने तब पीएम मोदी से एक प्रश्न पूछने की कोशिश की थी जब वे नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास स्टोर के साथ साझा बयान जारी कर रहे थे.

भारत में सोशल मीडिया पर लोग इन घटनाओं पर लगातार टिप्पणियां कर रहे हैं.

दरअसल जब हेला लेंग ने पीएम मोदी से सवाल पूछते हुए एकतरफा नॉर्वे में प्रेस की कथित आजादी का ढिंढोरा पीटा और कहा कि नॉर्वे प्रेस की आजादी में नंबर वन है, आप दुनिया की आजादी में नंबर वन रहने वाले देश के पत्रकार से सवाल क्यों नहीं ले रहे हैं, हेला लेंग ने इस बयान को अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट भी किया.

हेला लेंग के इस पोस्ट पर जवाब देते हुए भारतीय दूतावास ने एक्स पर लिखा, “डियर मिस हेला लेंग दूतावास आज शाम 9:30 बजे होटल रैडिसन ब्लू प्लाज़ा में प्रधानमंत्री की यात्रा पर एक प्रेस ब्रीफिंग आयोजित कर रहा है. आपका वहां आकर अपने प्रश्न पूछने के लिए हार्दिक स्वागत है.”

इसी प्रेस ब्रीफिंग में हेला लेंग सवाल पूछने पहुंची थीं. हेला लेंग का सवाल हेकड़ी और उदंडता से भरा हुआ था.

उन्होंने भारत के विदेश मंत्रालय से पूछा, “जैसा कि हम अपनी साझेदारी को आगे बढ़ा रहे हैं, हमें आप पर भरोसा क्यों करें, क्या आप वादा कर सकते हैं कि आपके देश में जो मानवाधिकार का उल्लंघन हो रहा है उसे आप रोकने की कोशिश करेंगे.”

जब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि उन्होंने सवाल सुन-समझ लिया है और इसका उत्तर देंगे, तो नॉर्वे की इस पत्रकार ने कहा कि उन्हें इसका जवाब फ़ौरन चाहिए.

हेला लेंग के इस सवाल पर भारत के सीनियर राजनियक सिबी जॉर्ज ने उन्हें भारत के इतिहास, भूगोल, दर्शन पर एक लंबी जानकारी दी.

राजनियक सिबी जॉर्ज जब हेला लेंग को जवाब दे रहे थे तो उनका व्यवहार बेहद बचकाना था. वे एक बार तो प्रेस ब्रीफिंग को छोड़कर चली गईं, लेकिन फिर से वापस आईं.

सीनियर राजनियक सिबी जॉर्ज ने मजबूती से भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि भारत 5000 साल पुरानी सभ्यता है, जिसने दुनिया को शून्य, योग और शतरंज जैसी चीजें दी हैं. हमने कोविड के समय दुनिया को वैक्सीन उपलब्ध कराई और G20 जैसे मंच पर नेतृत्व किया. उन्होंने भारत के संविधान का जिक्र करते हुए कहा कि यह मौलिक अधिकारों की पूरी गारंटी देता है और चुनाव के जरिए सरकार बदलने का अधिकार सबसे बड़ा मानवाधिकार है.

सिबी जॉर्ज ने कहा कि कुछ लोग ignorant NGO की एक-दो रिपोर्टों के आधार पर सवाल पूछते हैं लेकिन भारत के विशाल पैमाने और विविधता को नहीं समझते.

इस दौरान हेला लेंग बार-बार टोकती रहीं. तो जॉर्ज ने साफ कहा, “You asked a question, this is my press conference. Let me answer.” 

सिबी जॉर्ज ने कहा, “ये मेरी प्रेस कॉन्फ़्रेंस है. आपने सवाल किया है. अब आपको मेरा जवाब सुनने का धैर्य होना चाहिए.”

सिबी जॉर्ज ने तब फिर कहा, “मैं भरोसे की ही बात कर रहा हूं. जब पूरी दुनिया कोविड महामारी से जूझ रही थी. तब हमने दुनिया के 150 से ज़्यादा देशों को वैक्सीन और दवा दी. पूरी दुनिया को हमने संकट से उबारने में मदद की. दुनिया ने हम पर विश्वास जताया. भरोसा होता है ये.”

MEA के अधिकारी ने आगे इस बात पर जोर दिया कि भारत ने आजादी के तुरंत बाद ही महिलाओं को वोट देने का अधिकार दे दिया था, जबकि इसके विपरीत कई ऐसे देश थे जहां महिलाओं को वोट का अधिकार दशकों बाद मिला. उन्होंने कहा, “1947 में, हमने अपनी महिलाओं को वोट देने की आज़ादी दी. मैं जानता हूं कि कई देशों में महिलाओं को वोट का अधिकार भारत द्वारा यह आज़ादी दिए जाने के कई दशकों बाद मिला.”

जॉर्ज ने जोर देकर कहा कि भारत का चुनावी लोकतंत्र ही समानता और मानवाधिकारों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का सबसे मज़बूत सबूत है. उन्होंने कहा, “मानवाधिकारों का सबसे अच्छा उदाहरण क्या है? सरकार बदलने का अधिकार, वोट देने का अधिकार. और भारत में ठीक यही हो रहा है. हमें इस बात पर बहुत गर्व है.”

भारत के अधिकारी ने भारत में आयोजित जी20 समिट का जिक्र करते हुए कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे मुश्किल हालात में भारत की मेजबानी में सभी देश एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर आए. भारत अफ़्रीकी देशों की चिंताओं को भारत ने मंच दिया. ये होता है भरोसा.”

भारत के राजनयिक सिबी जॉर्ज जवाब दे ही रहे थे और वे ब्रीफिंग रूम छोड़कर चली गईं.

बता दें पीएम मोदी 5 दिनों की विदेश यात्रा पर हैं. ये घटना तब हुई जब वे नॉर्वे में थे.

बाद में लॉन्ग ने X पर अपना बचाव करते हुए कहा, “पत्रकारिता कभी-कभी टकराव वाली होती है. हम जवाब चाहते हैं. अगर कोई इंटरव्यू देने वाला, खासकर जिसके पास सत्ता हो, मेरे पूछे गए सवालों का जवाब नहीं देता, तो मैं बीच में टोककर ज़्यादा सटीक जवाब पाने की कोशिश करूंगी. यही मेरा काम और फर्ज है. मुझे जवाब चाहिए, सिर्फ बातें नहीं.”

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