कैशकांड में फंसे में जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. अभी वो इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज हैं. उन्हें पद से हटाने के लिए महाभियोग की प्रक्रिया चल रही है. लो सभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार उनके इस्तीफे के साथ ही अब यह प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी.
दिल्ली आवास से मिला था कैश
गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट के जज रहते वक्त उनके घर से बड़ी मात्रा में कैश मिला था. कैश का कुछ हिस्सा तो जला हुआ था. इसके बाद इस मामले में काफी तूल पकड़ा था. संसद में जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव चल रहा था.
15 मार्च को शुरू हुआ था विवाद
यह विवाद तब शुरू हुआ था जब 15 मार्च को जस्टिस यशवंत वर्मा केउनके दिल्ली स्थित आवास पर बड़ी संख्या में जले हुए नोट मिले थे. इसके बाद उनका ट्रांसफर इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया. सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित तीन सदस्यीय पैनल ने उन्हें पद से हटाने की सिफारिश की. जस्टिस वर्मा ने किसी तरह के कदाचार में लिप्त होने से इनकार किया है.
संसद में आया महाभियोग
गौरतलब है कि पिछले साल अगस्त में सत्ता पक्ष और विपक्ष के कुल 152 सांसदों ने उस समय दिल्ली हाईकोर्ट में कार्यरत रहे जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था. प्रस्ताव स्वीकार करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था, हालांकि जस्टिस वर्मा ने समिति की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे 16 जनवरी को खारिज कर दिया गया. इसके बाद वह समिति के समक्ष पेश हुए और अपना पक्ष रखा.
