ईरान और अमेरिका के बीच आखिरी घंटों में संघर्षविराम, ट्रंप झुके या मोज्तबा? , कैसे बनी बात, जानें इनसाइड स्टोरी

अमेरिका ने ईरान को होर्मुज खोलने या तबाही के लिए तैयार रहने का बुधवार सुबह 5.30 बजे तक का अल्टीमेटम दिया था. उल्टी गिनती शुरू होने के बीच पूरी दुनिया सांसें थामे हुए दुआ कर रही थी कि दोनों देशों के बीच कोई सहमति बन जाए ताकि और ज्यादा विनाश न हो. समयसीमा खत्म होने के ठीक डेढ़ घंटे पहले भारतीय समयानुसार सुबह करीब 4 बजे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पोस्ट आया, जिसमें सीजफायर का ऐलान किया गया. फिर पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ का भी 5.30 बजे के करीब पोस्ट आया कि दोनों देशों के बीच जंग रोकने पर रजामंदी हो गई है. पाकिस्तान दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे संदेशवाहक की भूमिका निभा रहा था. सीजफायर के कुछ घंटों पहले दोनों पक्षों की ओर से नानुकुर के साथ शर्तें थोपी जाती रहीं और फिर थोड़ा नरमी दिखाते हुए संघर्षविराम पर मुहर लगा दी गई. ट्रंप ने दो टूक कहा था कि अगर ईरान होर्मुज खोलने और दो हफ्तों के लिए संघर्षविराम पर राजी नहीं हुआ तो हम पूरी सभ्यता को खत्म कर देंगे.

ट्रंप झुके या मोज्तबा खामेनेई?
विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका-ईरान-इजरायल संघर्षविराम पर भले ही दोनों देश जीत का दावा कर रहे हों और ये दोनों पक्षों के लिए राहत की बात है. होर्मुज ब्लॉक होने से कच्चे तेल की कीमतों, घरेलू मोर्चे पर दबाव से ट्रंप फिलहाल बीच का रास्ता चाहते थे. वहीं युद्धविराम के कुछ घंटों पहले तेल के भंडार खार्ग द्वीप पर हमले से ईरान को वार्निंग सिग्नल मिला, उसके बाद उसके पास भी बातचीत की टेबल पर आने के अलावा कोई ठोस विकल्प नहीं था. होर्मुज से जहाजों की आवाजाही पर शुल्क की शर्त मनवा लेना भी उसकी जीत है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 7 अप्रैल 2026 की रात 8 बजे (EST) यानी सुबह 5.30 बजे तक का अल्टीमेटम दिया था. उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को नहीं खोलता है तो अमेरिका ईरान के सभी पावर प्लांट और पुलों को तबाह कर देगा. जैसे-जैसे रात 8 बजे का समय नजदीक आता गया, सबकी धड़कनें बढ़ी हुई थीं. देर रात हंगरी दौरे पर गए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को भी बातचीत में शामिल किया गया. 7-8 अप्रैल की रात को राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर संघर्षविराम पर घोषणा की. इसके तुरंत बाद ईरानी अधिकारियों ने भी इसकी पुष्टि कर दी.

मध्यस्थों की भूमिका में पाकिस्तान
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने इस पूरे समझौते में मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभाई. पाकिस्तानी सेना प्रमुख और राजनयिकों ने अमेरिकी अधिकारियों जेडी वेंस और स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच मैसेज इधर से उधर पहुंचाने का काम किया. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि वह ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका को इस्लामाबाद में चर्चा के लिए आमंत्रित कर रहे हैं. लेकिन सीजफायर के बाद क्या अमेरिका या ईरान बातचीत की मेज पर आमने सामने होंगे या नहीं, ये अभी स्पष्ट नहीं है. पाकिस्तान का कहना है कि यह समझौता लेबनान में लड़ रहे इजरायल और हिजबुल्ला पर भी लागू होता है.

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