जमशेदपुर में पूज्य डा. चंद्रभानु सत्पथी गुरुजी का आगमन 20 को, सर्किट हाउस साई सेंटर में होगा भव्य समारोह आयोजित, शहरवासियों के बीच भोग वितरण

जमशेदपुर, 18 जनवरी (रिपोर्टर): जमशेदपुर में करीब 13 वर्षोंे के बाद एक बार फिर पूज्य डा. चंद्रभानु सत्पथी गुरुजी का 20 जनवरी को आगमन हो रहा है. इस उपलक्ष्य में साई सेंटर परिसर में शाम में भव्य समारोह का आयोजन किया जाएगा. साई सेंटर कमेटी ने शहरवासियों से समारोह में भाग लेने की अपील की.
रविवार की शाम सर्किट हाउस एरिया स्थित साई सेंटर में आयोजित प्रेसवार्ता में साई सेेेंटर के अध्यक्ष एस के बेहरा ने कहा कि 20 अक्टूबर, 2012 में मंदिर की स्थापना की गई थी, तब प्राण प्रतिष्ठा समारोह में पूज्य डा. चंद्रभानु सत्पथी गुरुजी का आगमन हुआ था. इसके बाद एक बार फिर वे जमशेदपुर आ रहे हैं, जो उनलोगों के साथ शहरवासियों के लिए भी खुशी की बात है. उन्होंने कहा कि 20 जनवरी को उन्हें रांची एयरपोर्ट से स्वागत कर जमशेदपुर लाया जाएगा. उसके बाद शाम में करीब छ: बजे से साई सेंटर में आयोजित समारोह में वे भाग लेंगे. उन्होंने कहा कि शाम छ: बजे उनका आगमन होगा. उसके बाद 6.15 बजे से पूजा होगी. वे शाम में आरती में भाग लेंगे. उन्होंने कहा कि शाम 6.45 बजे से नृत्य प्रस्तुति होगी. शाम 7.10 बजे भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा. उसके बाद 7.45 बजे से भोग वितरण होगा. उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्हें सार्इं सेंटर कमेटी की ओर से संचालन के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी. इस मौके पर साई सेंटर के महासचिव अमरेश सिन्हा कहा कि मंदिर में प्रतिदिन विधिवत पूजा, आरती होती. उन्होंने कहा कि दिन में तीन बार आरती होती है. सत्यनारायण कथा का आयोजन किया जाता. होली व राम नवमी का सामूहिक उत्सव (सम्पूर्ण समुदाय के लिए भोग व्यवस्था सहित), अन्नदान / पूर्व-निर्धारित स्थानों पर मासिक भोजन वितरण, समुदाय के कल्याण के लिए नि:शुल्क चिकित्सा शिविर का भी आयोजन किया जाता है.
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पूज्य गुरुजी डॉ. चंद्रभानु सत्पथीजी का संक्षिप्त परिचय
पूज्य गुरुजी डॉ. चंद्रभानु सत्पथी जी शिरडी साईं बाबा से गहन रूप से जुड़े एक प्रतिष्ठित आध्यात्मिक गुरु हैं. वे बाबा के श्रद्धा व सबूरी के संदेश का व्यापक प्रसार करते हुए पवित्रता, विनम्रता, आत्मसंयम व नि:स्वार्थ सेवा के मूल्यों पर विशेष बल देते हैं. उनकी सरल, व्यावहारिक व प्रेरणादायी शिक्षाएं आत्मिक उन्नति, नैतिक जीवन तथा ईश्वरीय इच्छा के प्रति समर्पण की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करती हैं. शिक्षाविदों व प्रशासकों के प्रतिष्ठित परिवार में जन्मे गुरुजी ने वर्ष 1972 में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में उत्तर प्रदेश कैडर के अंतर्गत अपनी सेवा प्रारंभ की. उत्तर प्रदेश सरकार व भारत सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन करने के बाद वे वर्ष 2008 में पुलिस महानिदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुए. अपने दीर्घ व उत्कृष्ट सेवाकाल के दौरान उन्हें भारत के राष्ट्रपति की ओर प्रदत्त अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया गया, जिनमें पुलिस वीरता पदक (1985), दीर्घ एवं सराहनीय सेवा हेतु पुलिस पदक (1991) तथा विशिष्ट सेवा हेतु पुलिस पदक (1997) प्रमुख हैं. अपने प्रशासनिक एवं व्यावसायिक दायित्वों से परे, पूज्य गुरुजी एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित विद्वान, आध्यात्मिक चिंतक, लेखक, समाजसेवी, परोपकारी एवं मानवतावादी के रूप में विख्यात हैं। उनके योगदान राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से परे जाकर समाज के सभी वर्गों—धर्म, जाति, लिंग एवं सामाजिक-आर्थिक स्थिति—से ऊपर उठकर मानव कल्याण को समर्पित हैं.
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कई प्रतिष्ठित सम्मानों से किए गए हैं सम्मानित
गुरुजी डा. सत्पथी को अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया है, जिनमें ‘श्री गोविंद नारायण सम्मान’ (2012), ‘श्री गुरु भागवत’ (2012) हेतु श्रीमती प्रतिभा पाटिल द्वारा प्रदत्त सम्मान, संगीत एवं आध्यात्मिक क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए ‘बाबा बैद्यनाथ संगीता रत्न’ (2011) तथा ‘दिव्य संगीता शिरोमणि’ (2011) सम्मिलित हैं। ओडय़िा आध्यात्मिक साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें ‘महापुरुष जगन्नाथ दास सम्मान’ (2011) से भी विभूषित किया गया.

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