झारखंड में बालू घाटों के आवंटन का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने हटाया स्टे

रांचीः झारखंड में बालू घाट और लघु खनिज के आवंटन का रास्ता साफ हो गया है. मंगलवार को पेसा नियमावली लागू नहीं होने से जुड़ी अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई.

राज्य सरकार और पंचायती राज विभाग की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि झारखंड मे पेसा नियमावली को लागू कर दिया गया है. दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका को निष्पादित करते हुए बालू घाटों और लघु खनिज के आवंटन पर लगे रोक के आदेश को वापस ले लिया है.

हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका को किया निष्पादित

दरअसल, पेसा नियमावली लागू नहीं होने पर आदिवासी बुद्धिजीवी मंच ने अवमानना याचिका दायर की थी. पूर्व में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने पेसा नियमावली लागू होने तक लघु खनिज और बालू घाटों के आवंटन पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया था.

याचिकाकर्ता विक्टर मालतो का कहना है कि इंटरलॉकेटरी एप्लीकेशन सोमवार को ही फाइल कर पेसा नियमावली पर सवाल खड़े किए थे. साथ ही इसे एग्रावेटेड कंटेम्पट का मामला बताया था. इसे कोर्ट के 29 जुलाई 2024 के आदेश के पारा नंबर 12, 19, 21, 24 और 25 से असंगत बताया गया.

आदिवासी बुद्धिजीवी मंच देगा पेसा नियमावली को चुनौती

आदिवासी बुद्धिजीवी मंच के मुताबिक हाईकोर्ट ने मंगलवार को याचिका को निष्पादित करते हुए याचिकाकर्ता को यह छूट दिया है कि वे वर्तमान पेसा नियमावली को रिट याचिका के जरिए चुनौती दे सकते हैं. मंच की ओर से अधिवक्ता अभिषेक रॉय और ज्ञानंत कुमार सिंह ने पक्ष रखा. जबकि सरकार की तरफ से महाधिवक्ता राजीव रंजन और सचिन कुमार समेत अन्य ने दलील पेश की.

खास बात है कि मंच ने अनुसूचित क्षेत्रों में नगरपालिका की संवैधानिकता पर भी सवाल उठाते हुए याचिका दायर कर रखी है. खंडपीठ ने 11 मार्च 2026 को इसपर सुनवाई करने की तारीख तय की है. खंडपीठ ने सरकार को निर्देश दिया है कि किस आधार पर अनुसूचित क्षेत्रों में नगरपालिका का चुनाव मेसा अधिनियम के बगैर कराया गया. इसपर सरकार को शपथ पत्र देना है.

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