जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल शुरू, जुटे देशभर के साहित्यकार, कलाकार, चित्रकार

आठ साहित्यकार व कलाकार हुए सम्मानित, एक-एक लाख प्रदान
जमशेदपुर, 20 दिसम्बर (रिपोर्टर): जमशेदपुर व आसपास के क्षेत्रों पहली बार हो रहे दो दिवसीय जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2025 शुरू हुआ, जिसमें देशभर साहित्यकार, कलाकार, प्रशासक, गायक, फिल्मी दुनिया जुड़े लोग जुटे हैं. कार्यक्रम में कई पद्मश्री से सम्मानित हस्तियां भी शामिल हुई हैं. इस मौके पर आठ साहित्यकार व कलाकार को उनकी देशभर में फैली ख्याति व लोकप्रियता को सम्मानित किया गया.
शनिवार को बिष्टुपुर स्थित होटल रमाडा में दो दिवसीय जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल की शुरूआत लेखक व पत्रकार सोपान जोशी, चित्रकार मनीष पुष्कले, दिल्ली विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू डा. रंजन त्रिपाठी, अभिनेता राजेश जैस और आइएएस सौरभ तिवारी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया. इससे पहले श्री गणेश व मां सरस्वती वंदना की गई. वंदे मातरम गायन किए गए. जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल के संयोजक संदीप मुरारका ने अतिथियों का स्वागत करते हुए उनका परिचय कराया. कार्यक्रम में डा. अंजुम शर्मा, व्योमेश शुक्ल, बाबुषा कोहली, डा. रविदत्त बाजपेई, प्रो. स्वाति पराशर, बीएल मित्तल, डा. मयंक मुरारी, अचल प्रियदर्शी का नाम शामिल था. सभी को पुरस्कार राशि के रूप में एक-एक लाख रुपये का चेक भी प्रदान किया गया. इस मौके पर फिल्म अभिनेता राजेश जैस ने महोत्सव में नागपुरी गीत सुनाया व सभी अतिथियों को झारखंडी जोहार किया. उन्होंने कहा कि फिल्म फेस्टिवल में कई बार जाना होता है, जहां झारखंड का प्रतिनिधित्व नहीं दिखता. इसलिए वे उन फेस्टिवल में झारखंड का प्रतिनिधित्व कर सादगी गीत गाता गाते हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी के डीएसडब्ल्यू प्रो. डा. रंजन त्रिपाठी ने कहा कि लेखनी वैसी चीज है जो समाज को दिशा देती है, उनमें भाव पैदा करती है. उन्होंने कहा कि यह लेखनी ही है जो शहर को गांव, गांव को शहर से जोड़ता है। साथ ही स्वयं से जुडऩे का बहुत बड़ा माध्यम है. इससे हमलोगों में जिम्मेदारी का बोध कराता है. उन्होंने कहा कि इससे समाज व राष्ट्र का विकास होता है, साथ ही सम्पूर्ण विश्व भी जुड़ता है. आइएएस सौरभ तिवारी ने एक कविता मैं चिराग नहीं हजो हल्की हवाओं में बुझ जाऊ गायक श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. उन्होंने कहा कि शब्द शिल्पकारों का सृजन करता है. वरिष्ठ पत्रकार सोपान जोशी ने कहा कि जिस कार्यक्रम के लिए तोरणद्वार बनता है उसका एक खास मकसद है. उन्होंने कहा कि यह द्वार पूरे ब्रहांड को आमंत्रित करने के लिए लगाया जाता है. इस मौके पर निर्णाय मंंडल में शामिल अलग-अलग समाचार पत्रों के संपादक संजय मिश्रा, भवानंद झा, यू एन पाठक, गणेश मेहता, न्यू इस्पात मेल के संपादक ब्रजभूषण सिंह, चमकता आईना के संपादक जयप्रकाश राय, उदित अग्रवाल को भी स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया. इस मौके पर संयोजक संदीप मुरारका, कमल किशोर अग्रवाल, अभिषेक अग्रवाल गोल्डी, अंशुल रिंगसिया, मंटू अग्रवाल, अजय भालोटिया, राहुल चौधरी आदि मौजूद थे.
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हेमंत सरकार की भाषाओं के संरक्षण पर जोर: सोमेश
जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल में अतिथि के रूप में भाग ले रहे घाटशिला के विधायक सोमेश सोरेन ने ऐसे आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि भाषाओं के संरक्षण के लिए इस तरह के कार्यक्रम का होना जरूरी है. उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं का संरक्षण आवश्यक है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने इस ओर कदम बढ़ाया है. मुख्यमंत्री भी खुद इसके लिए गंभीर हैंं. राज्य के सभी क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई कक्षा पांचवीं तक स्कूलों में होगी. उन्होंने कहा कि इसके अलावा संताली शब्द व परंपरागत रीति-रिवाज के संरक्षण म्युजियम का भी निर्माण किया जाएगा. उन्होंने कहा कि घाटशिला में पंडित रघुनाथ मुर्मू जनजातीय विश्वविद्यालय का निर्माण हो रहा है, जो जनजातीय भाषाओं के संरक्षण के लिए जरूरी माना जा रहा. उन्होंने आयोजन समिति को इस तरह के आयोजन की के लिए बधाई दी.

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