पश्चिमी सिंहभूम में एक बार फिर मानवता हुई शर्मसार, मृत नवजात शिशु का शव कूट के डब्बा में लाने को विवश हुए परिजऩ

बंदगांव- पश्चिमी सिंहभूम में स्वास्थ विभाग कर्मियों की संवेदनहीनता का एक और मामला सामने आया है। कुछ असरा पूर्व एक मृत बच्चा को झोला में ले जाने की खबर से पूरे विभाग की किरकिरी हुई थी, अब ताजा मामला अनुमंडल अस्पताल चक्रधरपुर का है। तीन दिन पूर्व कराइकेला थाना के बंगरासाई निवासी रामकृष्ण हेम्ब्रम ने अपनी पत्नी रीता तिरिया को यहां भर्ती किया था .वहां शनिवार को आज रीता तिरिया ने एक बच्चे को जन्म दिया. मगर  बच्चे की मौत हो गई .इसके बाद अनुमंडल अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मी अपना पल्ला झाड़ते हुए रामकृष्ण हेंब्रम को नवजात शिशु को घर ले जाने का दबाव बार-बार डालने लगे. रामकृष्ण हेम्ब्रम मजबूर होकर अपने नवजात शिशु को एक कूट के डब्बे में भरकर अपने घर लाया. परिजनों की माने तो स्वास्थ्य कर्मियों ने उन्हें ना तो एंबुलेंस उपलब्ध कराया और ना ही उसे ले जाने के लिए कोई बेहतर विकल्प बताया. रामकृष्ण हेम्ब्रम गांव के निवासी होने के कारण उन्हें उतनी जानकारी नहीं थी इस कारण वे बच्चा का शव डब्बे में भरकर अपने घर ले आए. ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी गांव- देहात से जाने वाले मरीजों के साथ बेहतर ढंग से व्यवहार नहीं करते हैं. जिस कारण उन्हें बच्चे का शव को कूट के डब्बा में लाना पड़ा.
चाईबासा सदर अस्पताल में इलाज के दौरान मृत एक बच्चे के शव को नोवामुंडी झोला में लाने को विवश परिजनों की तस्वीर वायरल होने के बाद मामला हाई कोर्ट तक पहुंच गया । और इसके बाद जांच शुरु हुई।

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