जमशेदपुर की औद्योगिक आत्मा और टाटा स्टील की विरासत पर प्रकाशित कॉफी टेबल बुक “द टाटा ग्रुप बियॉन्ड बिज़नेस: इम्पैक्ट, एनकोमियम्स एंड अकोलेड्स”

 

जमशेदपुर, 28 फरवरी. जमशेदपुर को भारत का पहला सुव्यवस्थित औद्योगिक नगर कहा जाता है, यह केवल इस्पात उत्पादन का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण की जीवंत प्रयोगशाला रहा है. इसी ऐतिहासिक और औद्योगिक विरासत को समर्पित पुस्तक “द टाटा ग्रुप बियॉन्ड बिज़नेस: इम्पैक्ट, एनकोमियम्स एंड अकोलेड्स” प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्था पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया द्वारा प्रकाशित की गई है. यह कृति टाटा समूह की 150 से अधिक वर्षों की प्रेरक यात्रा को दस्तावेज़ीय रूप में प्रस्तुत करती है और विशेष रूप से जमशेदपुर एवं टाटा स्टील की गौरवशाली भूमिका को रेखांकित करती है.

यह पुस्तक केवल औद्योगिक उपलब्धियों का संकलन नहीं है, बल्कि उस मूल्य-आधारित नेतृत्व और सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है जिसने टाटा ग्रुप को विश्व के सर्वाधिक सम्मानित औद्योगिक समूहों में स्थापित किया. पुस्तक में उन विशिष्ट विभूतियों की विस्तृत सूची सम्मिलित है, जो टाटा समूह से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े रहे, चाहे वे प्रबंधन में रहे हों या कर्मचारी के रूप में कार्यरत रहे हों और जिन्होंने राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च सम्मान अर्जित किए.

3 भारत रत्न और 160 पद्म सम्मान

इस पुस्तक में तीन भारत रत्न, सत्रह पद्म विभूषण, बासठ पद्म भूषण, इक्यासी पद्म श्री, पाँच मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार, नौ द्रोणाचार्य पुरस्कार, उन्यासी अर्जुन पुरस्कार, पाँच राष्ट्रीय खेल पुरस्कार तथा तेरह माउंट एवरेस्ट विजेताओं का परिचय संकलित हैं. ये आँकड़े इस तथ्य को स्थापित करते हैं कि जमशेदपुर की धरती ने केवल इस्पात ही नहीं, बल्कि असाधारण प्रतिभाओं को भी गढ़ा है.
पुस्तक विशेष रूप से रतन टाटा सहित उन दूरदर्शी नेताओं को श्रद्धांजलि है, जिनके नेतृत्व में टाटा स्टील और टाटा समूह ने औद्योगिक उत्कृष्टता के साथ-साथ श्रमिक कल्याण, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में अनुकरणीय मानक स्थापित किए.

इस कृति के लेखक संदीप मुरारका ने शोधपरक दृष्टि से टाटा समूह की विरासत को संकलित किया है. टाटा ग्रुप से जुड़ी इस गौरवपूर्ण कॉफी टेबल बुक को उन्होंने तथ्यात्मक, प्रेरक और संदर्भात्मक शैली में प्रस्तुत किया है. यह पुस्तक उद्योग, प्रबंधन, इतिहास और सामाजिक अध्ययन के क्षेत्र में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी है.

“द टाटा ग्रुप बियॉन्ड बिज़नेस” यह संदेश देती है कि जब उद्योग मानवीय मूल्यों और राष्ट्र-निर्माण की भावना से जुड़ता है, तब वह केवल आर्थिक समृद्धि ही नहीं, बल्कि पीढ़ियों तक प्रेरणा देने वाली विरासत का निर्माण करता है.

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