सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में SIR अधिकारियों को धमकी दिए जाने के मामले पर कड़ी टिप्पणी की है। सोमवार को अदालत ने कहा कि अगर राज्य की मशीनरी फेल हो जाती है, तो हम देखेंगे कि क्या करना है।
गौरतलब है कि बुधवार को कथित तौर पर मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के विरोध में मोालदा के मोथाबाड़ी में तनाव फैल गया था। नाराज मतदाताओं ने पूरे दिन सड़क जाम कर अपने मतदान अधिकार बहाल करने की मांग की। रात में प्रदर्शन उग्र हो गया और प्रदर्शनकारियों ने बीडीओ कार्यालय का कई घंटों तक घेराव किया। इस दौरान 7 न्यायिक अधिकारियों को परिसर के अंदर बंधक बना लिया गया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। बाद में पुलिस ने हस्तक्षेप कर सभी अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला। घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को इस मामले की जांच सीबीआई या एनआईए से कराने का निर्देश दिया था। इसके बाद चुनाव आयोग ने जांच NIA को सौंप दी, जिसने शुक्रवार से अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी पूर्ण शक्तियों का प्रयोग करते हुए NIA को जांच अपने हाथ में लेने का निर्देश दिया है, भले ही दर्ज एफआईआर का अपराध एनआईए के शेड्यूल वाले अपराध न हों। कोर्ट ने कहा कि अगर एनआईए को अन्य आयाम मिलते हैं तो वह अतिरिक्त FIR भी दर्ज कर सकता है। एनआईए को समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट सौंपनी होगी। आज एजेंसी ने सीलबंद लिफाफे में अपनी प्रारंभिक स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की है। साथ ही, SC ने राज्य पुलिस को मामले के सभी रिकॉर्ड तुरंत एनआईए को सौंपने का निर्देश दिया है।
अदालत ने उस वीडियो पर भी गहरी आपत्ति जताई जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के कर्मियों को धमकी देने का आरोप लगाया गया था.
चुनाव आयोग ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री ने महिलाओं और लड़कियों से मतदान केंद्रों पर उपस्थित रहने का आग्रह किया था और जरूरत पड़ने पर ‘आवश्यक परिस्थितियों से निपटने’ के लिए रसोई के उपकरणों का उपयोग करने को कहा था.
सॉलिसिटर-जनरल तुषार मेहता ने एक रिपोर्ट का भी जिक्र किया जिसमें एक महिला न्यायिक अधिकारी ने दावा किया कि उसे अपनी जान का खतरा है और उसने गुहार लगाई कि अगर उसकी हत्या कर दी जाती है तो उसके बच्चों की देखभाल की जाए. चुनाव आयोग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने कहा, “जनभड़काऊ कार्रवाई से माहौल और खराब होगा”, जिस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “अगर राज्य तंत्र विफल होता है, तो हम देखेंगे…”
बंगाल SIR मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ कर रही है. पश्चिम बंगाल पुलिस के डीजीपी और राज्य के चीफ सेक्रेटरी वर्चुअली अदालत के समक्ष पेश हुए. कोर्ट ने पिछली सुनवाई में मालदा के एसपी और डीएम को भी कारण बताओ नोटिस भेजते हुए हाजिर होने को कहा था.
CJI ने कहा कि हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने एक पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने बताया है कि 6 अप्रैल को दोपहर 12:04 बजे तक, कुल 60 लाख 6,000 लंबित मामलों में से न्यायिक अधिकारियों द्वारा 59 लाख 15,000 आपत्तियों का निपटारा कर दिया गया है. बताया गया है कि आज तक ही न्यायिक अधिकारियों द्वारा पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी.
