ईरान का दूसरा टारगेट सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको का SAMREF रिफाइनरी रही है। यह मध्य पूर्व की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक है, जिसकी क्षमता लगभग 730,000 बैरल प्रति दिन है।
ईरान के हमलों से धुआं-धुआं खाड़ी देश; बदले की आग में धधक रहीं सऊदी-कुवैत-कतर की रिफाइनरियां
ईरान युद्ध का आज 20वां दिन है। इजरायली और अमेरिकी हमलों से बौखलाए ईरान ने अब खाड़ी देशों पर कहर बरपाना शुरू कर दिया है। इस जंग में अब खाड़ी देशों के तेल भंडार, रिफाइनरीज और अन्य ईनर्जी ठिकाने सीधे ईरान के निशाने पर आ गए हैं। ईरान ने कतर, कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के प्रमुख गैस और तेल प्रतिष्ठानों पर प्रचंड हमले किए हैं, जिससे न सिर्फ क्षेत्रीय तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है बल्कि इन देशों की रिफाइनरियां धधक रही हैं।
बड़ी बात ये है कि ईरान ने खाड़ी देशों पर ये हमले तब किए हैं, जब कुछ घंटे पहले ही उसे अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि ‘तुम्हें नरक दिखा देंगे।’ दरअसल, ईरान साउथ पार्स स्थित दुनिया के सबसे बड़े अपने गैस क्षेत्र पर इजरायली हमले और पिछले 18 दिनों में चार दर्जन से ज्यादा बड़े नेताओं की हत्या किए जाने से बौखलाया हुआ है। साउथ पार्स ईरान की लगभग 70 प्रतिशत घरेलू गैस की आपूर्ति करता है। इसक एक हिस्सा, कतर के साथ साझा करता था लेकिन इजरायली हमले में इसे धुआं-धुआं कर दिया गया। इस हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि यह हमला इजरायल ने किया था और चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने और उकसाने वाली कार्रवाई की, तो US इस पूरे गैस क्षेत्र को “पूरी तरह से तबाह” कर देगा।
डरने के बजाय और आक्रामक हो गया ईरान
लेकिन ईरान अमेरिकी चेतावनी से डरने के बजाय और आक्रामक हो गया है। उसने कुवैत की मीना अब्दुल्लाह रिफाइनरी पर हमला किया है। इसके बाद इस प्लांट में आग लग गई है। ईरान का दूसरा टारगेट सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको का SAMREF रिफाइनरी रही है। यह मध्य पूर्व की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक है, जिसकी क्षमता लगभग 730,000 बैरल प्रति दिन है। ईरान के मिसाइल हमलों से कतर के रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी में स्थित दुनिया के सबसे बड़े LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) केंद्र को भारी नुकसान पहुंचा है। कतर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LNG निर्यातक है, ऐसे में इस हमले का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
UAE की रुवैस रिफाइनरी पर भी हमले
संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी स्थित रुवैस रिफाइनरी पर भी ईरान ने ड्रोन हमले किए हैं। इसके बाद रुवैस रिफाइनरी ने एहतियात के तौर पर अपना कामकाज रोक दिया है। इसे संचालित करने वाली कंपनी ADNOC ने सीधे तौर पर किसी नुकसान की पुष्टि नहीं की है। वहीं सऊदी अरब के रास तनुरा रिफाइनरी पर भी ड्रोन हमले हुए, जिससे वहां आग लग गई और उसे आंशिक रूप से बंद करना पड़ा।
रिपोर्टों के अनुसार, अब वहां कामकाज फिर से शुरू हो गया है। इन ऊर्जा ठिकानों पर हमले के बाद ईरान ने कतर, UAE, सऊदी अरब, कुवैत, कतर पर हमले की चेतावनी दी है और इन एनर्जी सेंटर्स को खाली करने की चेतावनी दी है। इन हमलों में राहत की बात ये है कि इनमें कोई जनहानि नहीं हुई है लेकिन कई गैस इकाइयां धू-धू कर धधक उठीं। खबर है कि आपातकालीन टीमों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया है।
ईरान की कार्रवाई: ‘जवाबी हमला’
ईरान ने इन हमलों को अपने दक्षिण पार्स गैस क्षेत्र पर हुए हमलों का जवाब बताया है। इससे साफ है कि संघर्ष अब सीधे ऊर्जा अवसंरचना पर केंद्रित हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा किअगर कतर के गैस प्रतिष्ठानों पर दोबारा हमला हुआ तो “भारी जवाब” दिया जाएगा। कतर ने इस हमले को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा खतरा बताते हुए ईरानी सैन्य व सुरक्षा अधिकारियों को 24 घंटे में देश छोड़ने का आदेश दिया है।
कीमतों में भारी उछाल की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि इन हमलो से LNG सप्लाई में बाधा आने से दुनिया भर में गैस संकट गहरा सकता है और कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। इसका सबसे ज्यादा असर एशिया और यूरोप की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ेगा। बहरहाल, खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा केंद्रों पर हमले यह संकेत दे रहे हैं कि यह युद्ध अब केवल सैन्य टकराव नहीं रहा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करने वाला संकट बन चुका है। अगर जल्द ही हालात नहीं संभले, तो इसका असर पूरी दुनिया में ईंधन, बिजली और उद्योगों पर गहराई से महसूस किया जा सकता है।
