रांची: झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का, उनकी पत्नी मेनन एक्का, रांची के तत्कालीन एलआरडीसी कार्तिक कुमार प्रभात, तत्कालीन सीआई राजकिशोर सिंह, फिरोज अख्तर, अनिल कुमार, राजस्व कर्मचारी ब्रजेश मिश्रा, मणिलाल महतो और परशुराम को सीबीआई की विशेष अदालत ने सजा सुनाई है.
सजा के बिंदु पर बहस के बाद सीबीआई के विशेष जज श्याम नंदन तिवारी की अदालत ने एनोस एक्का, उनकी पत्नी मेनन एक्का समेत सभी दोषियों को सात-सात साल की सजा सुनाई है. सभी पर जुर्माना भी लगाया गया है. जुर्माने की राशि नहीं देने पर अतिरिक्त 1-1 साल की सजा काटनी होगी.
एनोस एक्का के अधिवक्ता अनिल कंठ ने कहा कि इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी.
15 साल पुराने मामले में दोषी करार
कोर्ट ने 29 अगस्त को सीएनटी का उल्लंघन कर बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से आदिवासी जमीन खरीदने के 15 साल पुराने मामले में दोषी ठहराया.
जबकि साक्ष्य के अभाव में गोवर्धन बैठा को बरी कर दिया गया. दोषी ठहराए जाने के साथ ही एनोस एक्का, उनकी पत्नी मेनन एक्का समेत अन्य दोषियों को न्यायिक हिरासत में ले लिया गया था. एनोस पर सीएनटी की धारा 46 का उल्लंघन कर 1.18 करोड़ रु से अधिक की संपत्ति खरीदने का आरोप था.
2012 में सीबीआई ने फाइल किया था चार्जशीट
दरअसल, हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने अगस्त 2010 में एनोस एक्का समेत अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी. साल 2012 में सीबीआई ने चार्जशीट फाइल किया था. नवंबर 2019 में सभी के खिलाफ आरोप तय हुआ था. बता दें कि एनोस एक्का को पारा शिक्षक मनोज कुमार की साल 2014 में हुई हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया. उन्हें साल 2018 में उम्र कैद की सजा सुनाई गई. वह जमानत पर थे. इसी बीच इस मामले
में दोषी करार दिए जाने पर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिए गये.
कोलेबिरा में एनोस एक्का की बोलती थी तूती
एक दौर था जब सिमडेगा के कोलेबिरा में एनोस एक्का की तूती बोलती थी. तत्कालीन मधु कोड़ा सरकार में एनोस एक्का के अलावा अन्य निर्दलीय विधायकों की टोली सरकार को कंट्रोल करती थी. एनोस ने साल 2005, 2009 और 2014 में कोलेबिरा से चुनाव जीता. लेकिन आय से अधिक संपत्ति और पारा शिक्षक की हत्या के मामले सामने आने के बाद उनकी परेशानी शुरू हो गई. पूर्व में ईडी की कार्रवाई के दौरान रांची, सिमडेगा, दिल्ली समेत कई राज्यों में उनकी संपत्तियां जब्त कर ली गई.