ईरान ने शनिवार को हिंद महासागर में स्थित सैन्य अड्डे डिएगो गार्सिया (Diego Garcia) को निशाना बनाकर मध्यम दूरी की दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. इस सैन्य अड्डे का संचालन अमेरिका और ब्रिटेन संयुक्त रूप से करते हैं. ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी (Mehr News Agency) की रिपोर्ट के मुताबिक कोई भी मिसाइल टारगेट पर नहीं लगी, लेकिन यह हमला तेहरान की सैन्य पहुंच में बड़े विस्तार का संकेत देता है. यह दिखाता है कि ईरान की मिसाइलों की रेंज दुश्मनों के अनुमान से कहीं अधिक है.
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि एक ईरानी मिसाइल बीच रास्ते में फेल हो गई, जबकि दूसरी को अमेरिकी युद्धपोत ने SM-3 इंटरसेप्टर से निशाना बनाया. हालांकि इंटरसेप्शन सफल रहा या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है. इस हमले ने इसलिए भी ध्यान खींचा क्योंकि डिएगो गार्सिया ईरान से लगभग 4,000 किलोमीटर दूर है. ईरान ने सार्वजनिक तौर पर अपनी सबसे लंबी दूरी की मिसाइल की रेंज 2,000 किलोमीटर ही बताई है.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची पहले कह चुके हैं कि उनकी मिसाइलें 2,000 किमी तक मार कर सकती हैं. भले ही ईरान की दोनों मिसाइलें अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंचीं, लेकिन इसने दुनिया को उसकी वास्तविक सैन्य क्षमता पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर दिया है. इस दूरी तक हमला करने की कोशिश से संकेत मिलता है कि ईरान अपनी पहुंच को पहले के अनुमान से कहीं आगे तक बढ़ा सकता है.
डिएगो गार्सिया का रणनीतिक महत्व
डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में अमेरिकी मिलिट्री पावर का एक अहम सेंटर है, जहां हैवी बॉम्बर प्लेन, सर्विलांस सिस्टम और महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है. इस हमले की कोशिश ने अमेरिका को ईरान से 4000 किलोमीटर दूर स्थित अपने सैन्य ठिकानों की सुरक्षा के लिए हाई लेवर मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात करने पर मजबूर कर दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक मिसाइल इंटरसेप्ट हुई और दूसरी फेल हुई, लेकिन रक्षा
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल इस कोशिश से ही ईरान ने रणनीतिक प्रभाव हासिल कर लिया. एक रक्षा सूत्र ने कहा, ‘तकनीकी नतीजे से ज्यादा महत्वपूर्ण है यह दिखाना कि उनकी पहुंच कितनी दूर तक है.’
इस घटना का भू-राजनीतिक असर
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में तनाव बढ़ा हुआ है, जहां ईरान पहले भी कार्गो शिप और अमेरिकी सुरक्षा बलों को निशाना बना चुका है. ब्रिटेन ने हाल ही में ‘सामूहिक आत्मरक्षा’ के तहत मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य अभियानों को
मंजूरी दी है. 10 डाउनिंग स्ट्रीट (ब्रिटिश प्रधानमंत्री का कार्यालय) के प्रवक्ता ने ईरान द्वारा अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना बनाने की निंदा करते हुए कहा कि यह क्षेत्र को और बड़े संकट में धकेल सकता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर बहुत देरी से प्रतिक्रिया देने के लिए ब्रिटेन की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें हैरानी है कि इतनी करीबी साझेदारी के बावजूद यूके ने देर से कदम उठाया. इस बीच, पेंटागन (अमेरिका का रक्षा मंत्रालय) ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अतिरिक्त युद्धपोत और मरीन सैनिकों को भेजने का फैसला किया है, ताकि समुद्री मार्गों और सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
ईरानी हमले के हैं रणनीतिक संकेत
डिएगो गार्सिया को निशाना बनाकर ईरान ने संघर्ष के दायरे को मध्य पूर्व से आगे बढ़ाकर हिंद महासागर तक फैला दिया है. यह संदेश साफ है कि अब कोई भी अमेरिकी ठिकाना पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ऐसी मिसाइल तकनीक का परीक्षण कर रहा है, जो वास्तविक मध्यम दूरी की बैलिस्टिक क्षमता के करीब है और भविष्य में दक्षिणी यूरोप या हिंद महासागर के और अंदर तक पहुंच सकती है. यह सिर्फ एक सैन्य परीक्षण नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी है. भले ही मिसाइलें लक्ष्य तक नहीं पहुंचीं, लेकिन इस प्रयास ने अमेरिका और ब्रिटेन को अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है.
